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8 मई को रखा जाएगा मोहिनी एकादशी का व्रत, समुद्र मंथन से जुड़ी है इसकी कहानी

Written by:Sanjucta Pandit
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मोहिनी एकादशी की बात करें तो इसकी कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है, जो कि हजार गायों के दान के बराबर फल देता है। गुरुवार के दिन यह व्रत पड़ने के कारण यह दिन इस बार अधिक शुभ माना जा रहा है।
8 मई को रखा जाएगा मोहिनी एकादशी का व्रत, समुद्र मंथन से जुड़ी है इसकी कहानी

हर महीने में दो बार एकादशी का व्रत रखा जाता है। सनातन धर्म में इसका बहुत अधिक महत्व है। इस व्रत को रखने से जातक के जीवन की सारी समस्याएं खत्म हो जाती है। साल भर में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं, लेकिन अधिक मास होने पर इसकी संख्या 26 हो जाती है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करके माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। इसे मोक्ष प्राप्ति का भी एक जरिया माना जाता है। इसी कड़ी में मोहिनी एकादशी का व्रत 8 मई को रखा जाएगा। इसे रखने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही मृत्यु लोक में जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

बता दें कि एकादशी का व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष को रखा जाता है। वहीं, मोहिनी एकादशी की बात करें तो इसकी कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है, जो कि हजार गायों के दान के बराबर फल देता है। गुरुवार के दिन यह व्रत पड़ने के कारण यह दिन इस बार अधिक शुभ माना जा रहा है।

शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष में मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है, जो कि इस साल 7 मई को सुबह 10:19 पर शुरू होगी। जिसका समापन अगले दिन यानी 8 मई को दोपहर 12:29 पर होगा। उदय तिथि के अनुसार, 8 मई 2025 को यह व्रत रखा जाएगा।

पौराणिक कथा

मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के बाद अमृत कलश निकला था, जिसे पाने के लिए असुरों ने भी दावा किया था। यदि वह अमृत पान कर लेते, तो वह भी अमर हो जाते। ऐसी स्थिति में असुरों को रोकने के लिए देवताओं ने श्री हरि से विनती की। तब उन्होंने मोहिनी का रूप धारण किया। सुंदरी के रूप में वह इतने ज्यादा आकर्षक लगे कि उन्हें देखकर असुर मोहित हो गए और श्री हरि ने अमृत देवताओं को दे दिया। तब से ही मोहिनी एकादशी का व्रत किया जाता है।

करें ये काम

इस दिन जातक को व्रत रखने के दौरान दूध, दही, फल, शरबत, साबूदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, मिर्च, सेंधा नमक, राजगीर का आटा, आदि का सेवन करना चाहिए। पूजा के बाद साफ जल और साफ बर्तन में ही कुछ भी खाएं।

ना करें ये काम

  • इस व्रत को रखने से पहले या फिर उसी दिन तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • इससे व्रत असफल माना जाएगा।
  • इस व्रत को करने वाले साधक को चावल और नमक का सेवन भी करना वर्जित माना गया है।

उपाय

  • इस दिन पीला वस्त्र पहनकर पूजा पाठ करें। पीले रंग का भोग लगाएं और पीला फूल ही भगवान विष्णु को अर्पित करें।
  • इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु के समक्ष 9 बाती का दीपक जलाएं। इससे घर में सुख शांति बनी रहेगी।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।)

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Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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