शारदीय नवरात्रि की सप्तमी पर करें नवपत्रिका पूजन, जानें पूजन विधि और महत्व

नवरात्रि की सप्तमी पर नवपत्रिका पूजन करने का विशेष महत्व माना गया है। झारखंड, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, ओडिशा जैसे क्षेत्रों में इसे बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
Navpatrika pujan

सनातन धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व माना गया है। यह ऐसा पर्व होता है जब 9 दिनों तक माता की अलग-अलग रूपों में आराधना की जाती है। इस त्यौहार को माता की शक्ति, भक्ति और आशीर्वाद का प्रतीक कहा जाता है। घरों से लेकर मंदिरों तक अलग-अलग तरह के अनुष्ठान और पूजन पाठ आयोजित किए जाते हैं।

नवरात्रि 9 दिनों के लिए होती है क्योंकि हर दिन माता के अलग रूप की पूजन अर्चन होती है। जो व्यक्ति माता के अलग-अलग रूपों की भक्ति भाव से पूजन करता है। उसके जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सुरक्षा आती है। नवरात्रि के सातवें दिन नवपत्रिका पूजन का विशेष महत्व माना गया है।

सप्तमी और नवपत्रिका पूजन (Navpatrika Pujan)

नवरात्रि का सातवां दिन माता कालरात्रि की पूजन के लिए विशेष माना गया है। इस दिन नवपत्रिका पूजन होती है, जिसे कलाबाऊ पूजन के नाम से पहचाना जाता है। चलिए आज हम आपको इस बारे में बता देते हैं।

कैसे होती है नवपत्रिका पूजन

नव पत्रिका पूजन माता दुर्गा और भगवान गणेश की सम्मिलित पूजन है। इसके लिए पूरे घर को पवित्र कर माता का स्वागत किया जाता है। इसमें केला, अनार, कच्ची हल्दी, मनका, धान, बिल्व, अशोक और जौ के पौधे की पत्तियों को बांधकर पूजन की जाती है। इन्हें देवी मां के 9 स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। इन्हें स्नान करवा कर सजाकर, फूल, अक्षत और दीपक से पूजन किया जाता है। परिवार में सुख, शांति, सकारात्मकता और समृद्धि लाने के लिए यह धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है। साल यह 29 सितंबर को मनाया जाएगा।

पत्तों का क्या महत्व

नवरात्रि की पूजन में जो अलग-अलग पेट उपयोग किए जाते हैं उनका अपना अलग महत्व है। केले के पत्ते शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक है। हल्दी का पत्ता शुभता समृद्धि और स्वास्थ्य लेकर आता है। मनका का पत्ता शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। बेलपत्र शक्ति का प्रतीक है और अनार का पत्ता ज्ञान, सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक कहा गया है। जयंती के पत्ते से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है। जौ का पत्ता उल्लास, ऊर्जा और सौंदर्य लेकर आता है, धान के पत्ते से पोषण और समृद्धि की प्राप्ति होती है। अशोक का पत्ता सत्य और विजय का प्रतीक है और जीवन में शुद्धता लाता है।

Diksha Bhanupriy
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Diksha Bhanupriy

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"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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