नवरात्रि (Navratri 2025) के त्यौहार का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व बताया गया है। यह ऐसे दिन होते हैं जब माता के 9 स्वरूपों की 9 दिनों तक आराधना की जाती है। शारदीय नवरात्रि का आज नौंवा दिन है, जिसे अंतिम दिन के नाम से पहचाना जाता है।
नवरात्रि तिथि की शुरुआत प्रतिपदा से होती है, जिस दिन घट स्थापना या कहें कि कलश स्थापना की जाती है। कलश स्थापना का विशेष महत्व माना गया है और 9 दिनों तक इसकी पूजन अर्चन की जाती है। क्या आपके दिमाग में कभी आया है कि नवरात्रि स्थापना के समय हम जो कलश और अखंड ज्योत जलाते हैं इसका समापन पर क्या करना चाहिए? चलिए आज हम आपको इसके बारे में जानकारी देते हैं।
नवरात्रि स्थापन कलश का क्या करें? (Navratri 2025)
नवरात्रि के दौरान अगर अपने घर में मिट्टी का कलश स्थापित किया था तो उसे नदी, तलाब में विसर्जित कर देना चाहिए। अगर आपने पीतल तांबे या किसी अन्य धातु का कलश स्थापित किया है तो आप उसे संभाल कर रख सकते हैं और अगले नवरात्रि में उसका दोबारा उपयोग किया जा सकता है।
कलश के नारियल का क्या?
नवरात्रि की महानवमी पर आप कलश पर रखा नारियल फोड़ कर प्रसाद के रूप में बांट सकते हैं। आप चाहे तो जिन कन्याओं को आप भोजन करने के लिए बुलाने वाले हैं। उन्हें नारियल का टुकड़ा प्रसाद के रूप में दे सकते हैं।
कलश के जल का क्या करें
नवरात्रि के कलश में जल भी मौजूद होता है। इस जल को आप अपने घर के अलग-अलग स्थान पर छिड़क सकते हैं। ऐसा कहते हैं कि इससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश हो जाता है। आप चाहे तो इस जल को तुलसी में भी अर्पित कर सकते हैं।
कलश के सिक्के का क्या करें
कलश स्थापित करने से पहले उसके अंदर एक सिक्का भी रखा जाता है। जल निकालने के बाद आप इस सिक्के को बरकत के रूप में तिजोरी या अपने धन के स्थान पर रख सकते हैं। यदि आप व्यापार करते हैं तो इस दुकान के गले में भी रख सकते हैं।
अखंड ज्योत का क्या करें?
नवरात्रि के समापन पर जो अखंड ज्योत जल रही है उसे जलने दे आपको इसे अपने हाथों से नहीं बुझाना है। तेलिया घी आप जो भी इसमें डाल रहे हैं वह खत्म होगा तो यह अपने आप ही ठंडी हो जाएगी। जब यह ठंडी हो जाए उसके बाद मिट्टी के कलश और बाकी पूजन सामग्री के साथ आप इस नदी में विसर्जित कर सकते हैं। जो दीपक अपने उपयोग किया है उसे आप अपनी पूजन में आगे इस्तेमाल कर सकते हैं।
जौ का क्या करें?
नवरात्रि के मौके पर कुछ लोग अपने घरों में जौ उगाते हैं। नवमी की तिथि पर इन्हें विसर्जित करने की परंपरा शुरुआत से ही रही है। इतना याद रखें कि इन्हें इधर-उधर ना फेंके बल्कि किसी पवित्र नदियां तालाब में विसर्जित करें।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News नहीं करता।






