रुद्राक्ष एक ऐसी चीज है जिसका संबंध भगवान शिव से बताया जाता है। ऐसा कहते हैं कि भोलेनाथ के आंसुओं से इसकी उत्पत्ति हुई थी। इसका नाम रुद्र और अक्ष से मिलकर बना है जिसका अर्थ शिव के आंसू होता है। ज्योतिष में इसे बहुत असरकारी माना गया है।
रुद्राक्ष के बारे में जो पौराणिक कथा मिलती है उसके अनुसार जगत के कल्याण के लिए जो महादेव ने हजारों सालों तक की गई समाधि के बाद अपनी आंखें खोली तो उनके नेत्रों से आंसू गिरे। इससे एक वृक्ष की उत्पत्ति हुई और इसी से रुद्राक्ष उत्पन्न हुआ। चलिए आज हम आपको ऐसे पहचान के तरीके और धारण करने के नियम के बारे में बताते हैं।
रुद्राक्ष धारण करने के नियम
- रुद्राक्ष धारण करने से पहले इसे कच्चे दूध और गंगाजल से अच्छी तरह से शुद्ध कर लें। इस दौरान ॐ नमः शिवाय का जाप जरूर करें।
- अगर आपने इसे धारण कर रखा है तो मांस मदिरा का सेवन बिलकुल न करें और शमशान घाट जाते समय इसे उतार दें।
- अपना पहना हुआ रुद्राक्ष व्यक्ति को कभी भी दूसरे को नहीं देना चाहिए।
- इसे हमेशा लाल या पीले रेशमी धागे में पहना जाता है। आप चाहे तो इसे सोने और चांदी में भी जड़वा सकते हैं।
कैसे पहचाने रुद्राक्ष
गर्म पानी से
रुद्राक्ष को कम से कम आधा घंटा तक उबलते हुए पानी में डालें। असली रुद्राक्ष पर उबलते पानी का कोई असर नहीं होता और वह रंग नहीं छोड़ता। वहीं अगर इस पर गोंद रंग लगा कर दोनों हिस्से को चिपकाया गया है तो वह रंग छोड़ देगा और अलग हो जाएगा।
पानी में तैराकर
यह रुद्राक्ष की पहचान करने का सबसे पुराना तरीका है। आपको बस एक क्लास साफ पानी लेना होगा और उसमें रुद्राक्ष डालना होगा। असली रुद्राक्ष भारीपन की वजह से पानी में डूब जाता है। वहीं अगर इसे लकड़ी या प्लास्टिक का बनाया गया होगा तो यह पानी के ऊपर तैरने लगेगा। हालांकि कई बार बहुत ज्यादा पुराने सूखे हुए रुद्राक्ष तैरने लगते हैं।
तांबे से करें पहचान
रुद्राक्ष इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गुणों से भरपूर होता है। अगर आप तांबे के सिक्कों के बीच इस रखेंगे और हल्का सा दबाव देंगे तो इसमें हलचल महसूस होती है, ये घूमने लगता है।
Disclaimer: यहां दी गई सूचना केवल एक सामान्य जानकारी है। उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। MP Breaking News इसकी पुष्टि नहीं करता।





