मंदिर जाने के बाद आपने अक्सर देखा होगा कि कई लोग दर्शन करने के बाद कुछ देर मंदिर की सीढ़ियों पर बैठ जाते हैं। कुछ लोग आंख बंद करके भगवान का ध्यान करते हैं, तो कुछ शांति से वहीं बैठकर प्रार्थना करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों किया जाता है?
दरअसल, सनातन धर्म में मंदिर की सीढ़ियों को सिर्फ पत्थर की सीढ़ियां नहीं माना जाता, बल्कि इनके पीछे गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। माना जाता है कि मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर भगवान का ध्यान करने से मन शांत होता है और मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं।
मंदिर की सीढ़ियों को क्यों माना जाता है खास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर की रचना देव विग्रह यानी भगवान के स्वरूप की तरह मानी जाती है। मंदिर का शिखर भगवान का मुख माना जाता है, जबकि मंदिर की सीढ़ियों को उनके चरणों का स्थान कहा जाता है।
इसी कारण कई लोग दर्शन के बाद सीढ़ियों पर बैठकर भगवान को याद करते हैं। मान्यता है कि यहां बैठकर आंख बंद करने और भगवान का ध्यान करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
दर्शन के बाद सीढ़ियों पर क्यों बैठते हैं लोग?
माना जाता है कि जब कोई व्यक्ति मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर सच्चे मन से प्रार्थना करता है, तो भगवान उसकी बात जल्दी सुनते हैं। दरअसल, मंदिर का वातावरण शांत और पवित्र होता है। यहां बैठने से मन के नकारात्मक विचार कम होते हैं और मानसिक शांति मिलती है। कई लोग अपनी गलतियों के लिए भगवान से क्षमा भी मांगते हैं। धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर कुछ देर भगवान का स्मरण करने से जीवन के दुख और तनाव कम होते हैं।
मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर बोला जाता है यह श्लोक
अनायासेन मरणम्, बिना देन्येन जीवनम्।
देहान्त तव सानिध्यम्, देहि मे परमेश्वरम्।।
इस श्लोक का अर्थ है कि व्यक्ति भगवान से प्रार्थना करता है कि जीवन बिना कष्ट के बीते और अंतिम समय में भगवान का साथ मिले।
कब अशुभ माना जाता है सीढ़ियों पर बैठना?
मंदिर की सीढ़ियों पर बैठना हमेशा शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर कोई व्यक्ति वहां बैठकर दूसरों की बुराई करता है, राजनीति या झगड़े की बातें करता है, तो इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। दरअसल, मंदिर को पवित्र स्थान माना जाता है। इसलिए वहां बैठकर सांसारिक विवाद, गुस्सा या गलत बातें करने से बचना चाहिए।
मंदिर में क्या करना चाहिए?
दर्शन के बाद मंदिर की सीढ़ियों पर कुछ मिनट शांत बैठना अच्छा माना जाता है। इस दौरान भगवान का ध्यान करें और मन में सकारात्मक बातें रखें। माना जाता है कि ऐसा करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। कई लोग इसे आत्मिक ऊर्जा पाने का माध्यम भी मानते हैं।
क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं?
धर्म विशेषज्ञों के अनुसार मंदिर केवल पूजा करने की जगह नहीं, बल्कि मन को शांत करने का स्थान भी है। इसलिए मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है। लेकिन वहां बैठकर गलत बातें करना या किसी का अपमान करना अशुभ माना गया है।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।






