उत्तर प्रदेश में समग्र और समावेशी विकास की नई गाथा लिखने के लिए डिजिटल जनगणना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं इसी क्रम में, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखपुर प्रवास के दौरान गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित अपने आवास पर डिजिटल जनगणना के प्रथम चरण, स्वगणना (सेल्फ एनुमेरेशन) का ऑनलाइन प्रपत्र भरकर इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की।
दरअसल मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से 21 मई तक चलने वाली डिजिटल स्वगणना की प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी करने की अपील की है। उन्होंने जोर दिया है कि यह न केवल एक प्रशासनिक कार्य है, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लिए अपने भविष्य को आकार देने का एक सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने इस पहल को देश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जो भविष्य की नीतियों और योजनाओं के लिए ठोस आधार प्रदान करेगा।
सटीक एवं विश्वसनीय डेटा तैयार हो सकेगा
दरअसल यह उल्लेखनीय है कि पूरे देश में जनगणना का कार्य प्रगति पर है, जिसके पहले चरण में घर के मुखिया और घर की लोकेशन सहित अन्य मूलभूत जानकारियां डिजिटल माध्यम से एकत्रित की जा रही हैं। जनगणना में स्व-गणना का विकल्प पहली बार उपलब्ध कराया गया है, जिससे प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आएगी और अधिक सटीक एवं विश्वसनीय डेटा तैयार हो सकेगा। यह डेटा भविष्य की योजनाओं के निर्माण में आधारशिला का काम करेगा और विकास कार्यों को सही दिशा प्रदान करेगा। नागरिक मोबाइल, लैपटाप और डेस्कटाप से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
सक्रिय रूप से सहभागिता दर्ज कराने का आह्वान किया
मुख्यमंत्री ने स्वगणना पोर्टल पर स्वयं अपनी सभी आवश्यक जानकारियां सावधानीपूर्वक दर्ज कीं और सभी निर्धारित कॉलमों को पूर्ण किया। उन्होंने इस प्रक्रिया में प्रदेश के सभी नागरिकों से सक्रिय रूप से सहभागिता दर्ज कराने का आह्वान करते हुए कहा कि यह देश की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना है। इसका मुख्य उद्देश्य ‘हमारी जनगणना-हमारा विकास’ की भावना को साकार करते हुए सटीक आंकड़े जुटाना है, जो प्रदेश के विकास और कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी रूपरेखा तैयार करने में सहायक सिद्ध होंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं सही लाभार्थियों तक पहुंचें।
जनगणना केवल जनसंख्या की गणना तक ही सीमित नहीं
जानकारी दे दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 7 मई को लखनऊ से डिजिटल जनगणना के पहले चरण ‘स्वगणना’ का विधिवत शुभारंभ किया था, जिसके बाद से यह प्रक्रिया पूरे प्रदेश में सुचारू रूप से जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह समग्र, समावेशी और सुनियोजित विकास का एक सशक्त आधार भी है। जनगणना 2027 यह सुनिश्चित करने का भी माध्यम बनेगी कि विकास की धारा में समाज का अंतिम व्यक्ति भी समान रूप से सहभागी बन सके और उसे योजनाओं का समुचित लाभ मिल सके। यह राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका को रेखांकित करता है।
रियल टाइम डेटा प्राप्त करने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग कर जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और त्वरित बनाया गया है। यह तकनीक न केवल डेटा संग्रह को आसान बनाती है, बल्कि उसकी विश्वसनीयता और सटीकता को भी बढ़ाती है, जिससे नीति-निर्माताओं को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है और संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित होता है।






