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क्यों बिना आरती अधूरी मानी जाती है पूजा? जानें इसका अर्थ और महत्व

Written by:Sanjucta Pandit
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कहा जाता है कि यदि पूजा में आरती ना हो, तो वह अधूरी मानी जाती है। आखिर इसकी जरूरत क्या है और इसे क्यों की जाती है? यदि इसे ना किया जाए तो क्या होगा?
क्यों बिना आरती अधूरी मानी जाती है पूजा? जानें इसका अर्थ और महत्व

सनातन धर्म में पूजा-पाठ का बहुत अधिक महत्व है। मंदिर हो या फिर घर सुबह-शाम सभी देवी-देवताओं की विधि पूर्वक पूजा अर्चना की जाती है। इसके बाद अंत में आरती होती है। सभी धार्मिक स्थलों में आरती का बहुत अधिक महत्व है, जिसे देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर से श्रद्धालु देखने के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान पूरा माहौल आध्यात्मिक हो जाता है। आरती के बिना कोई भी धार्मिक अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाता है।

आज के आर्टिकल में हम आपको यह बताने जा रहे हैं कि आखिर क्यों आरती के बिना कोई भी धार्मिक अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाता है, आखिर इसकी जरूरत क्या है और इसे क्यों की जाती है? यदि इसे ना किया जाए तो क्या होगा?

आरती का मतलब

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, आरती का मतलब संपूर्णता होता है। इस शब्द को संस्कृत के आरात्रिक से लिया गया है। जिसका सीधा सा मतलब होता है अंधकार हटाना। आरती से होने वाली रोशनी अपने आसपास अंधेरे को हटाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस रोशनी से भगवान के दर्शन होते हैं। इससे मन को भी शांति मिलती है और जीवन से अंधेरा छट जाता है। इसलिए पूजा समाप्ति से पहले आरती की जाती है।

पुराणों में मिलता है जिक्र

इस दौरान देवी देवताओं के सामने प्रार्थना और आरती गाते हुए दीपक को उनके आगे घुमाया जाता है। विष्णुधर्मोत्तर पुराण में इस बात का जिक्र किया गया है कि जो भी आरती को देखता है, वह अपनी कई पीढियां का उद्धार करता है। जिसका महत्व उत्तर स्कंद पुराण में भी बताया गया है। इसमें जिक्र किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति मंत्र नहीं पढ़ता, यदि उसे पूजा की विधि नहीं आती, लेकिन केवल वह आरती कर लें, तो भगवान उसकी पूजा स्वीकार कर लेते हैं। आरती करने से देवी देवता प्रसन्न होते हैं और श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

ऐसे उतारें आरती

आरती करने का सही तरीका भगवान के चरणों से शुरू होता है। सबसे पहले आरती उतारते समय चार बार दीपक को सीधी दिशा में घूमाएं। जिसके बाद ईश्वर की नाभि के पास दो बार आरती करें। उसके बाद सात बार भगवान के मुख की आरती उतारें। इस दौरान शंख और घंटी भी बजा सकते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध और स्वच्छ हो जाएगा।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।)

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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