गरीब बच्चे को पीजा-बर्गर खिलाया तो रेस्टोरेंट संचालक ने युवक को निकाला बाहर

गरीब बच्चे को पीजा-बर्गर खिलाया तो रेस्टोरेंट संचालक ने युवक को निकाला बाहर

सतना पुष्पराज सिंह बघेल।

सतना सिटी कोतवली में एक ऐसा अजीबो गरीब मामला आया है।जिसमे  अमीरी और गरीबी का फर्क नजर आया है।जी हाँ गरीबी किस तरह अभिशाप है इसका जीता जागता नजारा सतना के एक रेटोरेंट मे सामने आया जहाँ एक नवयुवक जब गरीब बच्चों को रेटोरेंट में अपने पैसों से पीजा बर्गर खिलाने लगा  तो रेस्टोरेंट संचालक ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।गरीब बच्चे व उन्हें नास्ता करवाने वाला नव युवक रेटोरेंट से बाहर तो आ गया लेकिन गरीबी का मजाक और खुद की जलालत से मायूस होकर अब कोतवली थाने पहुचा है।

घटना आज उसवक्त की है जब सतना के कुछ समाजसेवी नव युवक गरीब बच्चो को पिज्जा बर्गर खिलाने रेस्टोरेंट ले गये थे, अमीरों के रेस्टोरेंट में गरीब बच्चो को देखते ही संचालक आगबबूला हो उठा आवर  गरीब बच्चो को यह कहकर रेस्टोरेंट से बाहर निकल दिया कि गरीबो के लिये ये नही है, इसपर युवाओ और रेस्टोरेंट मालिक से बहसबाजी भी हुई लेकिन आखिरकार गरीब बच्चो को रेस्टोरेंट के बाहर निकलना ही पड़ा, पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें कैमरे में कैद हुई है, रेस्टोरेंट मालिक के दुर्व्यवहार से आहत समाजसेवी युवाओ ने सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज करा दी है, देश समाज मे गरीबी अभिशाप है, गरीब और गरीबो को पैदा करने वाला जिम्मेदार समाज आज गरीबो से नफरत करने लगा है, समाज हमेशा गरीबो की सेवा को धर्म कहता है, सरकार गरीबो की योजना बनाकर अपना कर्तव्य करती है, लेकिन असलियत महज दिखवा साबित होती है, जब गरीबो को उनकी औकात दिखाई जाती है, विकृत अमीर समाज की इंसानियत को शर्मसार करने वाली तश्वीरें खुद बयाँ कर रही है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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