चंबल के किनारे लंबे समय से अवैध रेत कारोबार भी फल-फूल रहा था। अब प्रशासन ने इस अवैध धंधे पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। रघुनाथपुर थाना पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने चंबल के तटीय क्षेत्रों में छापेमारी कर अवैध रूप से जमा की गई भारी मात्रा में रेत को नष्ट कर दिया।
चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन न सिर्फ सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा था, बल्कि नदी के पर्यावरण और जैव विविधता पर भी गंभीर खतरा बन चुका था। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह निर्णायक कदम उठाया है, जिसे अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
कत्नीपुरा से बरौली तक चला अभियान
प्रशासन को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि चंबल नदी के किनारे कत्नीपुरा, बरौली, रिझेंटा और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध भंडारण किया जा रहा है। इसी सूचना के आधार पर रघुनाथपुर थाना पुलिस और वन विभाग की टीम ने सुनियोजित तरीके से एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दी। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर जमा करीब 450 ट्रॉली अवैध रेत को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस रेत की अनुमानित कीमत करीब 9 लाख रुपये है। कार्रवाई इतनी व्यापक थी कि रेत माफिया को संभलने तक का मौका नहीं मिला। टीम ने यह सुनिश्चित किया कि नष्ट की गई रेत दोबारा उपयोग में न लाई जा सके।
कच्चे रास्ते किए बंद, जेसीबी से रोकी गई अवैध आवाजाही
सिर्फ रेत नष्ट करना ही प्रशासन की रणनीति नहीं थी। अवैध रेत के परिवहन को पूरी तरह रोकने के लिए नदी घाटों से जुड़े कच्चे रास्तों को भी जेसीबी मशीन से खोदकर अवरुद्ध किया गया। ये वही रास्ते थे, जिनका इस्तेमाल रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहन रात के अंधेरे में करते थे। यह कदम बेहद जरुरी है, क्योंकि अक्सर देखा गया है कि कार्रवाई के बाद कुछ समय में अवैध गतिविधियां फिर शुरू हो जाती हैं। लेकिन इस बार रास्ते बंद होने से रेत माफिया की लॉजिस्टिक व्यवस्था को सीधा झटका लगा है। इससे साफ संदेश गया है कि प्रशासन अब आधे-अधूरे कदम नहीं उठा रहा, बल्कि जड़ से समस्या को खत्म करने की कोशिश कर रहा है।
पर्यावरण और जैव विविधता पर मंडरा रहा था खतरा
वन विभाग के अधिकारियों ने साफ कहा है कि चंबल में अवैध रेत खनन सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह नदी के पूरे इकोसिस्टम के लिए खतरा है। चंबल नदी घड़ियाल, मगरमच्छ और कई दुर्लभ जलीय जीवों का घर है। रेत का अंधाधुंध खनन इनके प्राकृतिक आवास को नष्ट कर देता है। रेत खनन से नदी की धार बदल जाती है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ता है और आसपास के गांवों की खेती प्रभावित होती है। इस लिहाज से यह कार्रवाई केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ी हुई है। वन विभाग ने इसे चंबल की जैव विविधता को बचाने की दिशा में जरूरी कदम बताया है।
सरकारी राजस्व को हो रहा था बड़ा नुकसान
अवैध रेत कारोबार का एक बड़ा असर सरकारी खजाने पर भी पड़ता है। नियमों के तहत खनन और रॉयल्टी से सरकार को जो राजस्व मिलना चाहिए, वह अवैध कारोबार के चलते सीधे माफियाओं की जेब में चला जाता है। थाना प्रभारी शशि तोमर ने कहा कि अवैध खनन और भंडारण से सरकार को लाखों रुपये का नुकसान होता है। रेत की मांग लगातार बनी रहती है, खासकर निर्माण कार्यों में। इसी मांग का फायदा उठाकर अवैध कारोबारी नियमों को ताक पर रखकर रेत निकालते और बेचते हैं। प्रशासन की यह कार्रवाई ऐसे लोगों के लिए साफ चेतावनी है कि अब इस तरह के धंधे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।





