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तहसीलदार का रीडर ले रहा था रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ दबोचा, मामला दर्ज

Written by:Atul Saxena
Published:
लोकायुक्त पुलिस ग्वालियर की टीम ने आज 13 जून को तहसीलदार पोहरी के न्यायालय कक्ष में तहसीलदार के रीडर पुनीत गुप्ता को आवेदक से 10000/- रुपये रिश्वत लेते हुए लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
तहसीलदार का रीडर ले रहा था रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ दबोचा, मामला दर्ज

lokayukta police action

भ्रष्टाचार पर लगातार कड़े एक्शन के बाद भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी अपनी आदतें नहीं बदल रहे, लोकायुक्त पुलिस मध्य प्रदेश की टीमें लगातार इनके खिलाफ ट्रैप की कार्रवाई कर रही है इसी क्रम में आज 13 जून को ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस ने तहसीलदार के रीडर को एक किसान से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा है।

ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस एसपी राजेश मिश्रा से मिली जानकारी के मुतबिक शिवपुरी जिले की पोहरी तहसील के गाँव रणधीर में रहने वाले अतर सिंह धाकड़ ने एक शिकायती आवेदन उनके कार्यालय में 10 जून को दिया था, शिकायत में पोहरी तहसील के तहसीलदार के रीडर पुनीत गुप्ता पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाये गए थे।

तहसीलदार कोर्ट का आदेश निकलवाने के बदले मांगी रिश्वत 

शिकायतकर्ता ने आवेदन में लिखा कि उसके गाँव में उसकी कृषि भूमि के बगल में शासकीय नाले पर अतिक्रमण है उसे हटाने के लिए तहसीलदार को आवेदन किया था, रीडर पुनीत गुप्ता तहसीलदार पोहरी का आदेश तैयार करवाकर अतिक्रमण हटवाने की कार्यवाही करवाने के एवज में 10000/- रुपये रिश्वत की मांग कर रहा है।

रिश्वत हाथ में आते ही लोकायुक्त टीम ने दबोचा 

पुलिस अधीक्षक ने आवेदक की शिकायत का सत्यापन कराया जिसमें 10000/- रुपये रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। सत्यापन के आबाद आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया फिर
लोकायुक्त कार्यालय ग्वालियर की टीम गठित की गई, टीम ने आज 13 जून को तहसीलदार पोहरी के न्यायालय कक्ष में तहसीलदार के रीडर पुनीत गुप्ता को आवेदक से 10000/- रुपये रिश्वत लेते हुए लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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