मध्य प्रदेश के सिंगरौली में अपने हक़ और अधिकारों की लड़ाई के लिए जल सत्याग्रह कर रहे ग्रामीणों के आंदोलन को 62 घंटे से अधिक का समय हो चुका है लेकिन उनकी मांगों का ना तो प्रशासन ने अब तक कोई हल निकाला है ना ही रिलायंस पॉवर कंपनी प्रबंधन ने कोई बात की है, अब आंदोलन की कमान महिलाओं ने अपने हाथ में ले ली है , उन्होंने वहां पानी के बीच चिता आंदोलन शुरू कर दिया है।
सिंगरौली में विस्थापित ग्रामीणों ने गोहवया नदी में उतरकर अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह शुरू किया जो अब महिलाओं के चिता आंदोलन में बदल चुका है। ग्रामीण 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती आंदोलन जारी रहेगा।
आन्दोलनकारियों की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि रिलायंस पॉवर से निकलने वाली राख हर्रहवा डैम में डालना तत्काल बंद की जाये, जमा राख को वैज्ञानिक तरीके से हटाया जाए, डैम से एक किलोमीटर का क्षेत्र सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए, प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाये तथा विस्थापितों को रोजगार उपलब्ध कराया जाये।
ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर सड़क, पेयजल, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं भी मांग रहे
इसके अलावा ग्रामीणों द्वारा सभी प्रभावित गांवों में पक्की सड़क, स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार एवं नियमित स्वास्थ्य शिविर, बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की मांग की जा रही है। विस्थापित परिवारों की नियमित सुनवाई कर उनकी समस्याओं का समाधान किए जाने की मांग भी शामिल है।
महिलाओं ने शुरू किया “चिता आंदोलन”
आंदोलन में शामिल महिलाओं का कहना है कि लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन जब प्रशासन ने नहीं सुनी तो जल सत्याग्रह के बाद अब चिता आंदोलन के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
कलेक्टर बोले तहसीलदार आन्दोलनकारियों के संपर्क में
62 घंटे से अधिक समय से जारी जल सत्याग्रह और अब महिलाओं द्वारा शुरू किए गए चिता आंदोलन से प्रशासन पर समाधान की दिशा में तत्काल पहल करने का दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। जिला कलेक्टर गौरव बैनल से जब इस सम्बन्ध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि तहसीलदार लगातार आन्दोलनकारियों के संपर्क में है और समझाइश भी दे रहे हैं लेकिन आंदोलन करने वाले अपना कोई ज्ञापन या लिखित माँग प्रस्तुत ही नहीं कर रहे हैं।
राघवेन्द्र सिंह गहरवार की रिपोर्ट






