सिंगरौली के तेलदह इलाके में सामने आए इस मामले ने शराब की कथित अवैध सप्लाई और ग्रामीण क्षेत्रों में बिक्री को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने वाहन को रोककर रखा था और आबकारी विभाग को इसकी जानकारी भी दी थी। हालांकि, विभाग की ओर से मौके पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसे लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है।
तेलदह में शराब से भरा वाहन रोकने का दावा
ग्रामीणों के अनुसार, तेलदह क्षेत्र में उन्हें एक वाहन संदिग्ध हालत में दिखाई दिया। वाहन में शराब होने की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने उसे रोक लिया। उनका कहना है कि इसके बाद उन्होंने आबकारी विभाग को सूचना दी, ताकि अधिकारी मौके पर पहुंचकर वाहन की जांच कर सकें।
ग्रामीणों का दावा है कि सूचना देने के बाद वे काफी समय तक आबकारी टीम का इंतजार करते रहे। लेकिन उनके मुताबिक, इस दौरान संबंधित अधिकारी या टीम मौके पर नहीं पहुंची। इसी बीच वाहन से जुड़े लोग वहां से निकल गए।
बरगवां से तेलदह शराब पहुंचाने का आरोप
इस मामले में स्थानीय लोगों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरगवां स्थित शराब दुकान से तेलदह इलाके तक शराब पहुंचाई जा रही थी। कुछ लोगों ने शराब ले जाने के लिए बिना नंबर के वाहन के इस्तेमाल की बात भी कही है।
अगर यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो यह पता करना जरूरी होगा कि शराब की सप्लाई किसके माध्यम से की जा रही थी और इसके लिए किस वाहन का इस्तेमाल हुआ। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि शराब की यह कथित आपूर्ति नियमों के तहत थी या नियमों का उल्लंघन किया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध बिक्री को लेकर भी सवाल
तेलदह की घटना के बाद आसपास के ग्रामीण इलाकों में शराब की कथित अवैध बिक्री को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ जगहों पर किराना दुकानों, गुमटियों और छोटे दुकानों के जरिए शराब बेचने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
हालांकि, इन आरोपों की भी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो आबकारी विभाग के लिए इन इलाकों में जांच करना जरूरी हो जाता है।
सूचना के बाद आबकारी टीम क्यों नहीं पहुंची?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल आबकारी अमले की भूमिका को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने विभाग को वाहन के बारे में सूचना दी थी। इसके बावजूद काफी देर तक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।
अगर ग्रामीणों द्वारा दी गई सूचना सही है, तो यह जांच का विषय है कि सूचना कब दी गई, किस अधिकारी को दी गई और मौके पर टीम भेजने में कितना समय लगा। वहीं, विभाग के पास घटना से जुड़ी अपनी जानकारी हो सकती है, जिसे जांच के बाद सामने रखा जा सकता है।
कार्रवाई हुई तो पूरी सप्लाई चेन पर नजर जरूरी
स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले को सिर्फ एक वाहन तक सीमित न रखा जाए। उनका कहना है कि अगर वाहन में अवैध शराब मिलती है तो यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि शराब कहां से आई और किसे दी जानी थी।
यानी जांच केवल वाहन और उसमें मौजूद शराब तक सीमित रहने के बजाय पूरी सप्लाई की कड़ी तक पहुंचनी चाहिए। इससे यह साफ हो सकेगा कि मामला केवल एक बार की घटना है या इलाके में लंबे समय से शराब की कथित सप्लाई चल रही है। हालांकि, यह तभी संभव है जब विभाग मौके पर मिली जानकारी, दस्तावेज और संबंधित लोगों के बयानों की ठीक से जांच करे।
ग्रामीणों की नजर अब आबकारी विभाग की कार्रवाई पर
तेलदह की इस घटना के बाद ग्रामीणों की नजर अब आबकारी विभाग की अगली कार्रवाई पर है। ग्रामीण चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि शराब की अवैध सप्लाई या बिक्री के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियम के अनुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल इस मामले में ग्रामीणों के आरोप सामने आए हैं, जबकि आबकारी विभाग की ओर से विस्तृत जवाब आना बाकी है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि वाहन में मौजूद शराब अवैध थी या बरगवां से तेलदह तक कोई गैरकानूनी सप्लाई हो रही थी।






