सिंगरौली: मध्यप्रदेश के सिंगरौली में रिलायंस पावर प्लांट सासन से जुड़ी विस्थापितों की मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन छठवें दिन भी जारी है। अब यह आंदोलन एक नये चरण में पहुंच गया है। जल सत्याग्रह के बाद चिता आंदोलन और अब उसके बाद सांकेतिक फांसी आंदोलन शुरू हो गया है। छठवें दिन भी आंदोलन जारी रहने और मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलने के दावे के बीच विस्थापितों का आक्रोश बढ़ता दिखाई दे रहा है।
आंदोलन कर रहे लोगों का कहना है कि उन्होंंने अपनी विभिन्न मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए जल सत्याग्रह शुरू किया गया था। 62 घंटे से अधिक समय तक चले जल सत्याग्रह के बावजूद जब मांगों पर अपेक्षित समाधान नहीं हुआ तो आंदोलनकारियों ने विरोध का अगला चरण शुरू किया। इसके बाद महिलाओं ने चिता आंदोलन के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जल सत्याग्रह और चिता आंदोलन के जरिए शासन-प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन समाधान नहीं निकलने के कारण आंदोलन को अगले चरण में ले जाना पड़ा।

क्या हैं आंदोलनकारियों की मांगें?
- आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि रिलायंस पॉवर से निकलने वाली राख हर्रहवा डैम में डालना तत्काल बंद की जाये।
- जमा राख को वैज्ञानिक तरीके से हटाया जाये।
- डैम से एक किलोमीटर का क्षेत्र सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाये।
- प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाये तथा विस्थापितों को रोजगार उपलब्ध कराया जाये।
- ग्रामीणों द्वारा सभी प्रभावित गांवों में पक्की सड़क, स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार एवं नियमित स्वास्थ्य शिविर, बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की मांग।
बेनतीजा रही दो दौर की वार्ता
जिला पंचायत सदस्य संदीप शाह के अनुसार, विस्थापितों की मांगों को लेकर तहसीलदार और रिलायंस पावर प्लांट सासन के अधिकारियों के साथ दो दौर की वार्ता हुई है। हालांकि दोनों दौर की बातचीत किसी ठोस सहमति तक नहीं पहुंच सकी। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों के समग्र समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं जबकि कंपनी प्रबंधन की ओर से सभी मांगों पर सहमति नहीं बनी है।
कलेक्टर को सौंपा था मांग पत्र
संदीप शाह ने आगे बताया कि हाल ही में विस्थापितों के साथ जिला कलेक्टर से मुलाकात की गई थी। इस दौरान विस्थापित परिवारों की समस्याओं और मांगों से कलेक्टर को अवगत कराया गया तथा मांगों से संबंधित पत्र भी सौंपा गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि इसके बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन को आगे बढ़ाने की स्थिति बनी।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर ठोस और प्रभावी समाधान चाहते हैं। उनका दावा है कि जब तक उनकी मांगों पर निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
सिंगरौली से राघवेन्द्र सिंह गहरवार की रिपोर्ट





