मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और मानवीय संवेदनाओं की कमी को उजागर करती एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहां सर्पदंश से मृत एक आठ वर्षीय बच्चे के शव को उसके परिजन अस्पताल से घर तक मोटरसाइकिल पर ले जाने को मजबूर हुए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
यह मार्मिक घटना सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, हरफरी गांव निवासी बाबूलाल सिंह के आठ वर्षीय बेटे राकेश सिंह को शनिवार की रात एक सांप ने काट लिया था। सांप के काटने के बाद परिजन राकेश को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चितरंगी लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने का हर संभव प्रयास किया। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद रविवार सुबह इलाज के दौरान राकेश ने दम तोड़ दिया। मासूम राकेश की मौत के बाद, उसके परिजनों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई। उन्हें अस्पताल से अपने मृत बच्चे का शव गांव तक ले जाने के लिए शव वाहन की आवश्यकता थी।
तीन घंटे इंतजार के बाद भी नहीं मिला शव वाहन
परिजनों का आरोप है कि राकेश की मौत के बाद उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से शव को गांव तक ले जाने के लिए शव वाहन उपलब्ध कराने की मांग की। परिजनों ने बताया कि उन्होंने लगभग तीन घंटे तक अस्पताल में इंतजार किया, लेकिन उन्हें शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। इस लंबी प्रतीक्षा और अस्पताल की ओर से कोई सहायता न मिलने के बाद, परिजनों के पास कोई और विकल्प नहीं बचा। वे मजबूरन अपने मृत बच्चे के शव को एक मोटरसाइकिल पर रखकर अपने गांव हरफरी के लिए रवाना हो गए। इस मार्मिक दृश्य का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी स्वास्थ्य व्यवस्था की जमकर आलोचना हो रही है, और लोग प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं।
मामले में अस्पताल प्रशासन ने दी सफाई
वहीं, इस पूरे मामले पर चितरंगी के बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) डॉ. हरिशंकर सिंह वैश्य ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। डॉ. वैश्य ने बताया कि बच्चे को जब अस्पताल लाया गया था, तब उसकी हालत बेहद गंभीर थी और उसकी जान बचाना मुश्किल हो रहा था। डॉक्टरों की टीम ने उसकी जान बचाने के लिए अथक प्रयास किए, लेकिन दुर्भाग्यवश उसे बचाया नहीं जा सका। शव वाहन उपलब्ध न होने के आरोपों पर बीएमओ ने स्पष्ट किया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चितरंगी में शव वाहन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल से शव वाहन बुलाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन जिला मुख्यालय से वाहन को चितरंगी पहुंचने में कम से कम दो से तीन घंटे का समय लगता है। डॉ. वैश्य के अनुसार, परिजनों ने इतनी देर इंतजार करने से इनकार कर दिया और अपनी इच्छा से मोटरसाइकिल पर शव लेकर चले गए।
यह पहली बार नहीं है जब चितरंगी क्षेत्र से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से जुड़ी कोई घटना सामने आई है। बीते कुछ ही दिनों में यह चितरंगी क्षेत्र से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी दूसरी वायरल घटना है, जिसने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं और शव वाहन जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं कितनी लचर हैं और आम जनता को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में गंभीरता से विचार करने और तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि ऐसी हृदयविदारक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं और सुविधाएं मिल सकें।
सिंगरौली से राघवेंद्र सिंह की रिपोर्ट






