सोनभद्र खनन हादसा: दो दिन से जारी रेस्क्यू ऑपरेशन, NDRF-SDRF ने मलबे से 5 शव निकाले

सोनभद्र के ओबरा थाना क्षेत्र में हुए पत्थर खदान हादसे के बाद बचाव अभियान जारी है। जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह के अनुसार, लगभग 75 टन की एक विशाल चट्टान के कारण रेस्क्यू में दिक्कतें आ रही हैं, जिसे हटाने के लिए NDRF, SDRF समेत कई विशेषज्ञ टीमें काम कर रही हैं। अब तक पांच शव बरामद हुए हैं।
सोनभद्र खनन हादसा: दो दिन से जारी रेस्क्यू ऑपरेशन, NDRF-SDRF ने मलबे से 5 शव निकाले

सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में हुए खनन हादसे के बाद पिछले दो दिनों से जारी बचाव एवं राहत कार्य में अब तक 5 शव बरामद किए गए हैं। NDRF और SDRF की टीमें घटनास्थल पर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। पिछले 48 घंटों से अधिक समय से NDRF और SDRF की टीमें बेहद मुश्किल परिस्थितियों में मलबे को हटाने और दबे हुए लोगों को खोजने का काम कर रही हैं।

मलबे से 5 शव बरामद, कई और के दबे होने की आशंका

अधिकारियों के अनुसार, दो दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद बचाव दलों ने मलबे के नीचे से कुल 5 शवों को बाहर निकाला है। हालांकि, अभी भी कुछ और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है, जिसके चलते रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरी गहनता के साथ जारी रखा गया है। घटनास्थल पर भारी मशीनरी की मदद से मलबा हटाया जा रहा है।

शवों की पहचान की प्रक्रिया शुरू

बरामद किए गए सभी पांच शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल स्थित पीएम हाउस में रखवाया गया है। शवों की शिनाख्त के लिए उनके परिजनों को सूचित किया जा रहा है और उन्हें पहचान के लिए बुलाया गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला अस्पताल के मर्चरी हाउस के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

75 टन की एक विशाल चट्टान सबसे बड़ी बाधा

आपको बता दें, जिले के ओबरा थाना क्षेत्र स्थित बिल्ली मारकुण्डी खनन क्षेत्र में शनिवार को हुए पत्थर खदान हादसे की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने बताया था कि रेस्क्यू ऑपरेशन में लगभग 75 टन की एक विशाल चट्टान सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। इस चट्टान को हटाने के बाद ही मलबे में फंसे मजदूरों के बारे में स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

यह हादसा शनिवार दोपहर रासपहाड़ी में हुआ था, जिसके बाद से ही राहत और बचाव का काम तेजी से चलाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले कुछ घंटों में स्थिति और साफ हो सकती है।

कई विशेषज्ञ एजेंसियों की संयुक्त टीम जुटी

इस बड़े बचाव अभियान को सफल बनाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ टीमों को लगाया गया है। NDRF और SDRF की टीमों के साथ-साथ कोरिया की कंपनी दुसान के अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं। इसके अलावा, NCL (नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड), अल्ट्राटेक और पावर कारपोरेशन के विशेषज्ञ भी अपने उपकरणों और विशेषज्ञता के साथ रेस्क्यू में मदद कर रहे हैं।

75 टन की चट्टान हटाने पर टिकी उम्मीदें

जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ का लगभग 75 टन वजनी हिस्सा है, जो खिसक कर नीचे आ गया है। इसे हटाने के लिए बड़े पैमाने पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

“लगभग 75 टन वजनी पहाड़ के कारण रेस्क्यू अभियान में परेशानी आ रही है। इसे हटाने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी। तेजी से रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।” — बद्रीनाथ सिंह, जिलाधिकारी, सोनभद्र

अधिकारियों के अनुसार, जब तक यह भारी पत्थर नहीं हटता, तब तक यह कहना मुश्किल है कि मलबे के नीचे कितने लोग दबे हो सकते हैं। अभी तक के अभियान में केवल पांच शव बरामद किया गया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मृतकों के परिजनों को शासन के नियमानुसार हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी।

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आधिकारिक बाइट : कलेक्टर बद्रीनाथ सिंह

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Banshika Sharma
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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