कलेक्टर ने चखा आर्गनिक खेती से बनी सब्जियों का स्वाद

कलेक्टर ने चखा आर्गनिक खेती से बनी सब्जियों का स्वाद

ओरछा।मयंक दुबे।

नमस्ते ओरछा महोत्सव के लिए  जहा  एक ओर प्रशासन पिंक सिटी जयपुर की तरह ओरछा को क्रीम सिटी बना रहा है तो वही एक और बात और भी  यहाँ आने वाले मेहमानों के लिए खास होगी रामराजा रेस्टॉरेंट के द्वारा बनाई स्पेशल एस्प्रेसो कॉफी और ऑर्गनिक खेती की सब्जियों से बने पकवान साथ ही अलग अलग जगहों पर मिलने वाले बुन्देली व्यंजन ।

आज सुबह इन्ही व्यंजनों का स्वाद चखने कलेक्टर अक्षय सिंह ने  आर्गनिक खेती से बनी सब्जियों के पकवान का स्वाद चखा,,,साथ ही  रामराजा रेस्टोरेंट के संचालक  पर्वत लाल केवट की स्पेशल कॉफी की चुस्कियां ली दरअसल  दूर दराज क्षेत्र से आने वाले सैलानियों व डेलीगेट्स को बुन्देली व्यंजनों के जरिए नमस्ते ओरछा महोत्सव में इन खास व्यंजनों के जरिए आकर्षित  किया जाएगा ।।। गौरतलब है कि 6,7,8 मार्च को नमस्ते ओरछा महोत्सव में देश विदेश के सैकड़ो डेलीगेट्स ओरछा आने वाले है ऐसे में यहाँ के पारंपरिक भोजन व बुन्देली व्यजनों की विशेष व्यस्था जिला प्रशासन के द्वारा इन आगंतुकों के लिए की जा रही है जिसके लिए जिला कलेक्टर ने अक्षय सिंह ने ओरछा के मशहूर व्यंजनों को बनाने वालों के यहाँ जाकर यहाँ के लजीज पकवानों का स्वाद चखा साथ ही ओरछा के रामराजा  रेस्टोरेंट समेत समेत अन्य मशहूर स्थलों में अपना खाता खुलवाया जिससे की नमस्ते ओरछा महोत्सव में आने वाले मेहमानों को विशेष भोजन व मशहूर पकवानों से रूबरू होने का मौका देशी व विदेशी मेहमानों को मिल सके ।।।।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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