Doctor’s Day पर डॉक्टर से मारपीट, पुलिसकर्मी से हुआ विवाद, CCTV में कैद घटना

Doctor’s Day पर डॉक्टर से मारपीट, पुलिसकर्मी से हुआ विवाद, CCTV में कैद घटना

उज्जैन| योगेश कुल्मी| उज्जैन (Ujjain) के जिला चिकित्सालय में आज उस समय हंगामा मच गया जब एक पुलिसकर्मी (Police) ने डॉक्टर (Doctor) से नाराज होते मारपीट कर दी और बीच-बचाव करने आए डॉक्टर के सहयोगीयों पर भी हमला कर दिया । हालांकि सीसीटीवी (CCTV) में डॉ पक्ष के लोग भी मारपीट करते नजर आ रहे है ।

दरअसल डॉ अमित ने आरोप लगाया कि उज्जैन के पुलिस लाइन में पदस्थ राजू नामक आरक्षक आज जिला चिकित्सालय में अपना उपचार कराने पहुंचा था जहां उसे डॉक्टर पाटीदार ने फ्लू क्लीनिक जोकि बुखार सर्दी खांसी के लिए ही स्थापित किए हैं वहां जाने के लिए कहा था लेकिन कुछ देर बाद आरक्षक पुनः लौट कर आया और डॉक्टर पर नाराज होते हुए अपशब्दों का उपयोग करने लगा जहां डॉक्टर ने उसे अपशब्द उपयोग करने से मना किया तो उसने नाराज होकर डॉ अमित पाटीदार के साथ मारपीट शुरू कर दी |

मारपीट का माजरा देख आसपास के सहयोगी जब डॉक्टर को बचाने आए तो आरक्षक ने उन पर भी हमला कर दिया हालांकि इस पूरे मामले में किसी को कोई गंभीर चोट नहीं आई है लेकिन यह पूरा घटनाक्रम जिला अस्पताल के सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया| मामले की जानकारी लगने के बाद दोनों ही विभागों के प्रमुख अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले को शांत कराने की कोशिश की हालांकि दोनों ही पक्षों की ओर से मामले में शिकायती आवेदन पेश किया गया है अब पूरे घटनाक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद ही आगामी कार्रवाई होगी|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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