हिंदू धर्म में आने वाले सभी त्योहारों के साथ अलग-अलग तरह की परंपराएं जुड़ी हुई है।विजयादशमी के दिन एक तरफ जहां रावण दहन किया जाता है वहीं दूसरी तरफ शास्त्र पूजन और अन्य धार्मिक परंपराओं को भी निभाया जाता है। इस कड़ी में महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर दशहरा के दिन तहसील की ओर से ध्वजारोहण किया गया।

इस ध्वजारोहण से पहले जो ध्वजा मंदिर के शिखर पर चढ़ाई गई है। उसका विधिविधान से पूजन अर्चन किया गया। ध्वजा के इस पूजन की परंपरा को महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी महाराज ने संपन्न करवाया।

महाकाल के शिखर पर नई ध्वजा

ध्वजा पूजन के दौरान मंदिर में कई श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखी गई। सभी बड़े ही ध्यान से पूजन अर्जन देखते हुए नजर आए। विजयादशमी की शुभ मौके पर यह ध्वजा शिखर पर चढ़ाई गई। जैसे ही इसे शिखर पर चढ़ाया गया वहां मौजूद हर व्यक्ति भगवान श्री महाकालेश्वर के जयकारे लगाने लगा। इस दौरान पूरा परिसर जय महाकाल के जयघोष से गूंज उठा।

परंपरा से जुड़ा है आयोजन

श्री महाकालेश्वर मंदिर में विजयादशमी के दिन चढ़ाई जाने वाली ध्वजा का ये आयोजन मंदिर की पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इस धार्मिक परंपरा में श्रद्धालुओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इस ध्वजारोहण के कई लोग साक्षी बने और बाबा महाकाल से सुख समृद्धि की कामना की।