महाकाल की नगरी उज्जैन में शुक्रवार को 15.20 करोड़ रुपये की लागत से बने आधुनिक साइंस सेंटर का लोकार्पण किया जाएगा। दरअसल इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गजेंद्र सिंह शेखावत मौजूद रहेंगे। इसी मौके पर ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की भी शुरुआत होगी, जिसका उद्देश्य उज्जैन को ‘टाइम कैपिटल’ के रूप में पहचान दिलाना है।
दरअसल कार्यक्रम का आयोजन वसंत विहार स्थित तारामंडल परिसर में होगा। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे नए साइंस सेंटर का लोकार्पण किया जाएगा। इसके बाद ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ पर आधारित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ होगा। इस सम्मेलन में देश और विदेश के वैज्ञानिक, खगोलविद और विशेषज्ञ शामिल होंगे।
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आम लोगों को विज्ञान के प्रति जागरूक करना उद्देश्य
इस साइंस सेंटर के निर्माण पर करीब 15.20 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें केंद्र सरकार ने लगभग 6.50 करोड़ रुपये और राज्य सरकार ने करीब 8.56 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। इस केंद्र का उद्देश्य छात्रों, शोधार्थियों और आम लोगों को विज्ञान के प्रति जागरूक करना और उन्हें नई तकनीकों से परिचित कराना है।
आधुनिक गैलरी और सुविधाएं विकसित की गई
साइंस सेंटर में कई आधुनिक गैलरी और सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां साइंस फन गैलरी बनाई गई है, जहां बच्चे खेल-खेल में विज्ञान के सिद्धांत समझ सकेंगे। इसके अलावा आउटडोर साइंस पार्क, साइंस एंड टेक्नोलॉजी गैलरी और हेरिटेज थीम गैलरी भी तैयार की गई है। इन गैलरियों में विज्ञान, तकनीक और उज्जैन की खगोलीय विरासत से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही स्टूडेंट एक्टिविटी हॉल और एग्जिबिट डेवलपमेंट लैब भी बनाई गई हैं, जहां छात्र और शोधकर्ता प्रयोग और अध्ययन कर सकेंगे।
तीन दिन तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, खगोल विज्ञान, काल गणना और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के बीच संबंधों पर विचार किया जाएगा। सम्मेलन में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, इसरो के वैज्ञानिक और जापान सहित कई देशों के विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
डीप स्काई ऑब्जर्वेशन का कार्यक्रम भी रखा जाएगा
सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन के रूप में फिर से स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा स्पेस इकोनॉमी, अंतरिक्ष तकनीक, खगोल विज्ञान और भारत की वैज्ञानिक विरासत जैसे विषयों पर भी मंथन किया जाएगा। छात्रों और युवाओं के लिए भी इस आयोजन में कई गतिविधियां रखी गई हैं। इसमें सैटेलाइट मेकिंग वर्कशॉप, यूएवी और आरसी प्लेन ट्रेनिंग, टेलीस्कोप से रात्रि आकाश अवलोकन और सनस्पॉट स्टडी जैसी गतिविधियां शामिल हैं। डोंगला में डीप स्काई ऑब्जर्वेशन का कार्यक्रम भी रखा जाएगा, जिससे छात्र अंतरिक्ष के बारे में व्यावहारिक जानकारी हासिल कर सकेंगे।
यह आयोजन उज्जैन की खगोलीय और सांस्कृतिक विरासत को नए रूप में सामने लाने का प्रयास है। ‘टाइम कैपिटल’ के रूप में उज्जैन की पहचान स्थापित करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे शिक्षा, विज्ञान और पर्यटन के क्षेत्र में शहर को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।