महाशिवरात्रि का पर्व संपन्न होने के बाद धर्मनगरी उज्जैन की सड़कें एक बार फिर भगवान शिव के विवाह के उल्लास में सराबोर हो गईं। अवसर था 26वीं वार्षिक शाही शिव बारात और रिसेप्शन का, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्ति और उत्साह के साथ शामिल हुए। इस आयोजन ने शास्त्रों में वर्णित शिव बारात के दृश्य को जीवंत कर दिया।
यह भव्य बारात नगरकोट स्थित गंगेश्वर महादेव मंदिर से प्रारंभ हुई। बारात में भगवान महाकाल की पालकी, हाथी, घोड़े और बग्गियों के साथ-साथ शिव के गणों की टोली मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। सैकड़ों श्रद्धालु नंदी, भूत-प्रेत और अन्य गणों के वेश में डीजे की धुन पर झूमते हुए चल रहे थे। शहर के प्रमुख मार्गों जैसे छत्री चौक और गोपाल मंदिर से गुजरते समय स्थानीय निवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर बारात का जोरदार स्वागत किया।
26 वर्षों से चली आ रही परंपरा
इस आयोजन की परंपरा पिछले 26 वर्षों से अनवरत जारी है। महाकाल आरती परिवार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के लिए शहर भर में पत्रिकाएं बांटकर और पीले चावल देकर लोगों को निमंत्रण दिया गया था। हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई, जो इस आयोजन की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
समाजसेवी राजेश बाथम ने बताया कि यह आयोजन महाकालेश्वर मंदिर की शिवरात्रि के माह में रक्तसेन आरती और रक्त भंडार द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन शहरवासियों के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न होता है।
नरसिंह घाट पर भव्य रिसेप्शन और नगर भोज
बारात का समापन नरसिंह घाट के सामने स्थित कुमावत धर्मशाला में हुआ, जहां भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीकात्मक शाही रिसेप्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर में महिला संगीत और भजनों के साथ हुई। शाम को बारात के पहुंचने पर प्रसिद्ध भजन गायकों ने अपनी प्रस्तुतियों से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
रिसेप्शन के समापन पर एक विशाल नगर भोज का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। इस पूरे आयोजन ने उज्जैन में उत्सव जैसा माहौल बना दिया, जो कई दिनों तक याद किया जाएगा।






