उज्जैन बालगृह के भीतर रोज की तरह दिनचर्या चल रही थी। लेकिन अचानक एक खबर ने पूरे माहौल को बदल दिया तीन बच्चे बालगृह से गायब हो गए। जब तक स्टाफ को समझ आता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
उज्जैन बालगृह से बच्चों के फरार होने की यह घटना एक बार फिर कई सवाल खड़े कर रही है। बाथरूम की ग्रिल तोड़कर भागे इन बच्चों की तलाश में पुलिस रातभर जुटी रही, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
कैसे हुई पूरी घटना?
यह मामला उज्जैन के नागझिरी क्षेत्र स्थित लालपुर शासकीय बालगृह का है। मंगलवार शाम को तीन बच्चों ने बाथरूम की ग्रिल तोड़कर वहां से भागने में कामयाबी हासिल कर ली।
जानकारी के अनुसार, बच्चों ने पहले बाथरूम की ग्रिल को तोड़ा और फिर उसी रास्ते से बाहर निकल गए। यह सब इतनी चुपचाप हुआ कि बालगृह के स्टाफ को इसकी भनक तक नहीं लगी। जब गिनती के दौरान बच्चों की कमी महसूस हुई, तब जाकर मामला सामने आया। इसके बाद बालगृह में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस की सर्चिंग जारी, स्टेशन-बस स्टैंड पर भी तलाश
उज्जैन बालगृह से बच्चे फरार होने की सूचना मिलते ही नागझिरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने तुरंत शहरभर में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य संभावित जगहों पर भी बच्चों की तलाश की गई, ताकि वे कहीं दूर न निकल जाएं। लेकिन देर रात तक तीनों बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल पाया। पुलिस का कहना है कि आसपास के CCTV कैमरों की जांच की जा रही है और हर संभव कोशिश की जा रही है ताकि बच्चों को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके।
कौन हैं ये बच्चे? सामने आई अहम जानकारी
फरार हुए तीन बच्चों में से दो उज्जैन के ही रहने वाले बताए जा रहे हैं, जो पिछले छह महीने से इस बालगृह में रह रहे थे। वहीं तीसरा बच्चा शाजापुर जिले का है, जिसे महज एक हफ्ते पहले ही बालगृह में लाया गया था। इस वजह से यह मामला और भी संवेदनशील हो जाता है, क्योंकि नया बच्चा भी इतनी जल्दी फरार हो गया।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं, नहीं सुधरी व्यवस्था
उज्जैन बालगृह से बच्चों के फरार होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 20 जनवरी 2026 को भी इसी बालगृह से दो नाबालिग बच्चे बाथरूम की ग्रिल और वेंटिलेशन तोड़कर भाग गए थे। इसके अलावा नवंबर 2023 में भी तीन बच्चे कमरे की ग्रिल तोड़कर फरार हो चुके हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन मामलों में फरार हुए बच्चों का आज तक कोई पता नहीं चल पाया है। लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि समस्या पुरानी है, लेकिन समाधान अभी तक नहीं निकला।






