क्या विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली ठगी से आप परेशान हैं? क्या आपने कभी सोचा है कि काश कोई ऐसा तरीका होता जिससे आप बिना किसी चिंता के विदेश में अपने सपनों की नौकरी ढूंढ पाते और धोखेबाजों से भी बचे रहते? अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिन्होंने कभी किसी ट्रैवल एजेंट के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवाई है या ऐसे अनुभवों से बचने की उम्मीद रखते हैं, तो आपके लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। हरियाणा सरकार ने हाल ही में एक ऐसा कानून लागू किया है जो ट्रैवल एजेंटों द्वारा की जाने वाली ठगी पर लगाम लगाएगा और आम जनता को सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाएगा।
पुराने नियमों में एक बड़ा संशोधन किया
दरअसल हरियाणा सरकार ने ट्रैवल एजेंटों से जुड़े अपने पुराने नियमों में एक बड़ा संशोधन किया है। अब ‘हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ ट्रैवल एजेंट्स (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026’ लागू हो चुका है। शायद आप सोच रहे होंगे कि इस बदलाव की ज़रूरत क्यों पड़ी? दरअसल, पहले जो कानून (2025 में बना) था, उस पर केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। मंत्रालय का कहना था कि राज्य के उस कानून के कुछ नियम केंद्र के ‘उत्प्रवास अधिनियम, 1983’ से मेल नहीं खा रहे थे, बल्कि उससे टकरा रहे थे। इसका सीधा मतलब यह था कि विदेश में नौकरी के लिए लोगों को भेजने से जुड़े जो नियम पहले से ही केंद्र के कानून में तय थे, राज्य का कानून उनसे ओवरलैप कर रहा था, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी और ठगी करने वालों को फायदा मिल रहा था।
लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इस नए संशोधित कानून के तहत, हरियाणा के ट्रैवल एजेंट अब सिर्फ यात्रा से जुड़े काम ही कर सकेंगे। विदेश में नौकरी दिलाने या भर्ती से जुड़ा काम वे बिल्कुल नहीं कर पाएंगे। यह काम अब पूरी तरह से केंद्र सरकार के कानून के तहत ही होगा। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि ठगी करने वालों पर अब पहले से कहीं ज़्यादा सख्त कार्रवाई की जा सकेगी।”
यह विषय अब केंद्र के कानून के दायरे में आ गया
ये बदलाव हरियाणा विधानसभा के मार्च सेशन में एक संशोधन बिल लाकर किए गए हैं। इस संशोधन के बाद, ‘प्रवासी’ की परिभाषा भी बदल गई है। अब इसमें वे लोग शामिल नहीं होंगे जो विदेश में नौकरी के लिए जाते हैं, क्योंकि यह विषय अब केंद्र के कानून के दायरे में आ गया है। इसी तरह, ‘ट्रैवल एजेंट’ की परिभाषा को भी सीमित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अगर राज्य और केंद्र के कानूनों में कोई टकराव होता है, तो केंद्र का कानून ही सर्वोपरि माना जाएगा और वही लागू होगा। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो कानूनी स्पष्टता लाता है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि यह कानून कब लागू हुआ, तो आपको बता दें कि हरियाणा विधानसभा से इसे मार्च 2026 में पारित किया गया था। इसके बाद, 10 अप्रैल को इसे मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा गया और 4 मई को इस संशोधित बिल की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। हालांकि, इसमें एक छोटा सा पेंच अभी भी है। कानून तो लागू हो गया है, लेकिन इसके नियम अभी तक पूरी तरह से जारी नहीं हुए हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि ये नियम भी जल्द ही अधिसूचित कर दिए जाएंगे।
जानिए इस नियम से कैसे होता है फायदा?
आप सोच रहे होंगे कि यह कानून आम लोगों के लिए इतना ज़रूरी क्यों है? दरअसल, इसमें ऐसे सख्त प्रावधान रखे गए हैं जो आपको ठगी से बचाने में बहुत मददगार साबित होंगे। कल्पना कीजिए, अगर कोई ट्रैवल एजेंट आपके साथ धोखाधड़ी करता है, तो अब उसकी संपत्ति जब्त की जा सकती है। इतना ही नहीं, पीड़ित को मुआवजा दिलाने का प्रावधान भी इस कानून में किया गया है। अगर कोई मानव तस्करी या फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोगों को विदेश भेजता है, तो उसे 7 से 10 साल तक की जेल और 2 से 5 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। बिना रजिस्ट्रेशन के एजेंट बनने पर भी 2 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। यह सब इसलिए ताकि आप सुरक्षित रहें और धोखेबाज अपने अंजाम तक पहुंचें।
सबसे अहम और राहत भरी बात यह है कि अब इस कानून में ‘लोकपाल’ की एंट्री हो गई है। जी हां, इसमें लोकपाल का प्रावधान रखा गया है। इसका मतलब यह है कि अगर आप किसी ट्रैवल एजेंट से ठगी के शिकार होते हैं, तो आप सीधे लोकपाल के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। लोकपाल इस पूरे मामले पर सुनवाई करेगा और आम लोगों को न्याय दिलाएगा। सबसे अच्छी बात यह है कि जरूरत पड़ने पर ही मामला पुलिस को भेजा जाएगा, जिससे प्रक्रिया सरल और तेज हो सकेगी।






