उमरिया जिले की साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) नौरोजाबाद जोहिला कॉलरी एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। इस बार मामला साधारण अनियमितता का नहीं, बल्कि कोयले में मुरूम (मिट्टी) मिलाकर वजन बढ़ाने और करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का है। इस पूरे मामले को लेकर भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष ने सीधे भारत सरकार के कोयला एवं खान मंत्री को शिकायत भेजते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
भाजपा नेता दिलीप पांडे ने शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जोहिला कॉलरी में खुलेआम जेसीबी मशीनों के जरिए कोयले में मिट्टी मिलाई जा रही है। इसके बाद इस मिलावटी कोयले को बिना किसी गुणवत्ता परीक्षण के रेलवे रैक में लोड कर देशभर में सप्लाई किया जा रहा है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल आर्थिक नुकसान का बड़ा मामला है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
दिलीप पांडे ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि यह कार्य किसी एक व्यक्ति का नहीं हो सकता, बल्कि इसमें कई अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है। विशेष रूप से साइड इंचार्ज और सेल्स मैनेजर की भूमिका को संदिग्ध बताया गया है। इसके साथ ही बिलासपुर जोन के अधिकारियों की संलिप्तता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि इस संबंध में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें कथित रूप से मिलावट की प्रक्रिया दिखाई दे रही है। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक निष्क्रियता या संरक्षण की ओर इशारा करता है।
मिलावटी कोयला उद्योगों तक पहुँचने के आरोप
इस कथित घोटाले का असर केवल सरकारी राजस्व तक सीमित नहीं है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मिलावटी कोयला उद्योगों तक पहुंच रहा है, जिससे मशीनों को नुकसान, उत्पादन क्षमता में गिरावट और आर्थिक हानि जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यह स्थिति देश की औद्योगिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
शिकायत में भाजपा नेता ने की तीन मांगें
शिकायत में तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं पहली, पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच, दूसरी, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों का तत्काल निलंबन और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और तीसरी, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पारदर्शी मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करना।
पीएमओ और सीएमओ को भी भेजी प्रतिलिपि
इस शिकायत की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और उमरिया कलेक्टर को भी भेजी गई है। अब देखना होगा कि इस गंभीर आरोपों वाले मामले में शासन और प्रशासन किस तरह की कार्रवाई करता है। फिलहाल यह मुद्दा क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।







