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20 साल से काम कर रहे वन सुरक्षा श्रमिकों को अचानक हटाया, बजट का दिया हवाला, कर्मचारियों ने भूख हड़ताल, आत्मदाह की चेतावनी दी

Written by:Atul Saxena
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काम से हटाये गए कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि हमें काम पर वापस नहीं रखा गया तो हमारे सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जायेगा, ऐसे में हम आत्मदाह कर लेंगे ।
20 साल से काम कर रहे वन सुरक्षा श्रमिकों को अचानक हटाया, बजट का दिया हवाला, कर्मचारियों ने भूख हड़ताल, आत्मदाह की चेतावनी दी

Umaria News: वन‌ विकास निगम परियोजना मण्डल उमरिया के अंतर्गत लम्बे अर्से से काम कर रहे रोपण सुरक्षा एवं वन सुरक्षा श्रमिकों को वेतन देने के लिए विभाग में फण्ड न होने का हवाला देकर अचानक कार्य करने से मना कर दिया  जिससे उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

वन विकास निगम के अचानक इस फैसले से सुरक्षा श्रमिकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, सुरक्षा श्रमिकों ने कहा कि हम एक लम्बे अर्से से विभाग में सेवा दे रहे थे, मगर अचानक काम में आने से मना कर दिया गया जिससे हम बहुत परेशान हाल हमारे सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

हटाये गए श्रमिकों ने सौंपा संभागीय प्रबंधक को ज्ञापन 

श्रमिकों ने कहा कि यदि अगर दोबारा काम न रखा जाएगा तो हम कहां जाएंगे और अपने परिवार का भरण पोषण कहाँ से करेंगे, उन्होंने बताया कि हमने आज डीएम को पुनः काम में वापस रखने हेतु ज्ञापन भी सौंपा है, उन्होंने कहा कि सबसे कठिन काम हम ही करते हैं फिर भी हमारे से साथ ये दुर्व्यवहार किया जा रहा है।

कर्मचारियों ने भूख हड़ताल, आत्मदाह की धमकी दी 

वन विकास निगम के संभागीय प्रबंधक अमित पाटोदी ने कहा कि से सुरक्षा श्रमिक वृक्षारोपण में काम करते थे अभी हमारी वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है इसलिए काम करने से मना किया गया है  अभी हमने बजट की मांग की है बजट आते ही इन्हें वापस रखने का प्रयास करेंगे, उधर हटाये गए कर्मचारियों ने कहा कि यदि हमें वापस नहीं रखा गया तो या तो हम भूख हड़ताल पर जायेंगे जरुरत पड़ी तो आत्मदाह करेंगे।

उमरिया से ब्रजेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट 

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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