उमरिया जिले से चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जहाँ गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्कूली बच्चों को बांटी गई बूंदी खाने से उनकी तबीयत बिगड़ गई, घटना करकेली ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले शासकीय हाई स्कूल जरहा का है, जहाँ 26 जनवरी को बूंदी खाने के बाद 20 से 30 विद्यार्थी बीमार हो गए। बीमार बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई गई है।
दरअसल, 26 जनवरी के अवसर पर शासकीय हाई स्कूल जरहा में राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस मनाया गया था। कार्यक्रम के दौरान छात्रों को प्रसाद के रूप में बूंदी वितरित की गई थी। प्रसाद ग्रहण करने के कुछ ही समय बाद करीब 25 से 30 छात्रों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। बच्चों को उल्टी, पेट दर्द, चक्कर और घबराहट जैसी शिकायतें होने लगीं, जिससे स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया।
8 छात्राएं जिला अस्पताल में भर्ती
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को तत्काल इसकी सूचना दी गई। जिन छात्रों की हालत ज्यादा गंभीर थी, उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से जिला चिकित्सालय उमरिया रेफर किया गया। बताया जा रहा है कि करीब 8 छात्राओं की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज जारी है। वहीं, अन्य बीमार छात्रों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कर प्राथमिक उपचार दिया गया।
बूंदी के सेम्पल जाँच के लिए भेजे
घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि प्रसाद में किसी प्रकार की मिलावट या खराब गुणवत्ता के कारण बच्चों की तबीयत बिगड़ी है। हालांकि, वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए बुदी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
घटना के बाद अभिभावकों में आक्रोश
इस घटना के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश देखने को मिला। बच्चों के परिजनों का कहना है कि स्कूल में वितरित किए जाने वाले बूंदी की गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार लापरवाही ने बच्चों की जान को खतरे में डाल दिया।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
स्वास्थ्य विभाग बोला हालत चिंताजनक नहीं
वहीं, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी बीमार बच्चों की स्थिति अब स्थिर है और किसी भी तरह की जानलेवा स्थिति नहीं है।
फिलहाल, पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन की ओर से रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है।





