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धान खरीदी केन्द्रों पर अनियमितता, किसानों ने लगाये पैसे लेने के आरोप, कलेक्टर से की शिकायत

Reported by:Brijesh Shrivastav|Edited by:Atul Saxena
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शिकायत में धान खरीदी केंद्र प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। किसानों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
धान खरीदी केन्द्रों पर अनियमितता, किसानों ने लगाये पैसे लेने के आरोप, कलेक्टर से की शिकायत

paddy procurement centres

उमरिया जिले में धान खरीदी के 44 केंद्र बनाए गए थे जहां पर धान खरीदी जा रही थी अब धान खरीदी की अंतिम तिथि समाप्त होते ही अब किसानों के सवाल सामने आने लगे हैं। जिले के विभिन्न धान खरीदी केंद्रों को लेकर किसानों में नाराज़गी देखी जा रही है। किसानों का आरोप है कि धान खरीदी की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं और कुछ केंद्र प्रभारियों द्वारा अवैध रूप से पैसे लिए गए हैं।

मामला सामने आने के बाद किसानों ने इसकी शिकायत उमरिया कलेक्टर से की है। शिकायत में धान खरीदी केंद्र प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। किसानों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।

धान खरीदी केन्द्रों पर भ्रष्टाचार के आरोप 

किसानों का यह भी कहना है कि धान खरीदी सरकार की महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है। लेकिन जब इसी व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली जैसे आरोप लगते हैं, तो किसानों का भरोसा टूटता है। कई किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें डराया-धमकाया गया।

कलेक्टर से शिकायत, जांच का मिला भरोसा  

वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज होने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जा रही है। प्रशासन का कहना है कि शिकायत की गंभीरता से जांच की जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

किसानों को दोषियों पर कार्रवाई का इंतजार 

फिलहाल किसान प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि धान खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि किसानों को उनका हक मिल सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।

ब्रजेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट