बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने के बाद सुर्खियों में आए PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने शासन द्वारा जारी निलंबन आदेश को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब वह पहले ही अपने पद से त्यागपत्र दे चुके हैं, तो निलंबन की कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने शामली में जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किए जाने के आदेश को भी मानने से इनकार कर दिया है।
अलंकार अग्निहोत्री अपने इस्तीफे के फैसले पर अडिग हैं और उन्होंने इसे वापस लेने की किसी भी संभावना से इनकार किया है। यह मामला अब एक बड़े प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है, जिसमें एक अधिकारी सीधे तौर पर शासन के आदेश को चुनौती दे रहा है।
SIT जांच की मांग और गंभीर आरोप
अग्निहोत्री ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने एक विशेष जांच दल (SIT) गठित कर मामले की तह तक जाने का आग्रह किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी आवास पर उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया था।
अपने आरोपों में उन्होंने एक बेहद गंभीर बात का जिक्र किया है। उनके मुताबिक, एक फोन कॉल के दौरान उन्हें “पागल ब्राह्मण” कहकर संबोधित किया गया, जिसे उन्होंने अपनी जाति और स्वाभिमान का अपमान बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि यह आपत्तिजनक कॉल किसकी थी और उस व्यक्ति पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
प्रशासन का इनकार और शासन की कार्रवाई
वहीं, जिला प्रशासन ने अलंकार अग्निहोत्री द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। प्रशासन का कहना है कि उन्हें किसी भी तरह से अवैध रूप से नहीं रोका गया और न ही कोई मानसिक दबाव बनाया गया। उन्हें केवल एक सामान्य प्रशासनिक चर्चा के लिए बुलाया गया था।
इन आरोपों और इस्तीफे के घटनाक्रम के बाद, शासन ने अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया है। साथ ही, पूरे मामले की विभागीय जांच की जिम्मेदारी बरेली के मंडलायुक्त को सौंपी गई है, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है।
इस्तीफे से शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा विवाद 26 जनवरी को तब शुरू हुआ जब अलंकार अग्निहोत्री ने पांच पन्नों का एक पत्र जारी कर अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी थी। उनके इस कदम ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। इस्तीफे के बाद निलंबन का आदेश जारी होने से प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें मंडलायुक्त की विभागीय जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।





