CJI गवई ने ‘पुष्पा’ फिल्म का किया जिक्र, जंगलों के नुकसान पर सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त

CJI गवई ने ‘पुष्पा’ फिल्म का किया जिक्र, जंगलों के नुकसान पर सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त

हिमालयी राज्यों में तेजी से हो रही पेड़ों की कटाई ने पर्यावरण विशेषज्ञों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई ने कहा कि फिल्म ‘पुष्पा’ में दिखाए गए लकड़ी तस्करी के दृश्य जैसे ही वीडियो उन्हें इस मामले में भी देखने को मिले हैं। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

 केंद्र और राज्यों को नोटिस, 17 सितंबर तक जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस भेजते हुए 17 सितंबर तक जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करना चाहा है कि जंगलों की कटाई को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि पर्यावरण सचिव और हिमालयी राज्यों के मुख्य सचिवों से बात कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। सरकार जल्द रिपोर्ट दाखिल करेगी।

 जंगल कटाई से बढ़ रही भूस्खलन की घटनाएँ

याचिका में कहा गया कि हिमालयी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई से वनों को भारी नुकसान हो रहा है। इससे भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ गया है। अदालत में बताया गया कि अवैध कटाई की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे पर्यावरण असंतुलित हो रहा है। कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में त्वरित कदम उठाने की जरूरत बताई।

 पुराने संरक्षण नियमों में बदलाव पर चिंता

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले 55 पेड़ प्रजातियों को संरक्षित श्रेणी में रखा गया था। लेकिन हाल ही में आई नई अधिसूचना ने इस संख्या को कम कर दिया है, जिससे संरक्षण कमजोर पड़ सकता है। कोर्ट ने इसे पर्यावरण के लिए नुकसानदायक बताया। याचिकाकर्ता ने आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश के मामले को अन्य हिमालयी राज्यों के मामलों से जोड़कर एक साथ सुनवाई की जाए ताकि प्रभावी समाधान निकाला जा सके।

अगली सुनवाई 17 सितंबर को, पर्यावरण की रक्षा पर फोकस

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले को देश के पर्यावरण और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए सभी पक्षों को जवाब देने का समय दिया है। अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी। कोर्ट का लक्ष्य है कि जंगलों की कटाई पर रोक लगाई जाए और भूस्खलन जैसी घटनाओं से पर्यावरण को बचाया जाए। अब यह मामला पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बनता जा रहा है।

लेखक के बारे में
Follow Us :GoogleNews