
सीतापुर जेल से 23 महीने बाद रिहा हुए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने रामपुर लौटते समय पुलिस अधिकारियों पर गुस्सा जाहिर किया। रास्ते में समर्थकों की भीड़ और पुलिस बैरिकेडिंग देखकर उन्होंने कहा, “ये मेरे लोग नहीं, सड़क पर चलने वाले यात्री हैं। इन्हें मेरी वजह से क्यों परेशान कर रहे हैं?” पुलिस ने धारा 163 लागू कर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, जिससे आजम खान और भड़क गए।
रिहाई के बाद आजम खान के बेटों, अब्दुल्ला और आदिब आजम, ने उनका स्वागत किया। रामपुर पहुंचने पर समर्थकों की भारी भीड़ जुटने से ट्रैफिक जाम हो गया। पुलिस ने ड्रोन से निगरानी और सख्ती बरती, जिस पर आजम खान ने आम नागरिकों को परेशान करने का आरोप लगाया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे रामपुर में सियासी हलचल तेज हो गई।
‘फर्जी मुकदमों में फंसाया‘
समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव ने आजम खान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाया गया था। उन्होंने बसपा में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा, “आजम खान समाजवादी पार्टी के साथ थे और रहेंगे।” मुजफ्फरनगर सांसद हरेंद्र मलिक ने भी इन अफवाहों को बेबुनियाद बताया और आजम खान को पार्टी का मजबूत स्तंभ करार दिया।
‘आजम खान चाहे SP में रहें या…’
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तंज कसते हुए कहा कि आजम खान चाहे SP में रहें या BSP में जाएं, 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत पक्की है। इस घटना ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नया मोड़ ला दिया, जहां आजम खान की रिहाई और उनके बयानों ने चर्चा का केंद्र बना दिया है।
