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आम बजट को लेकर मायावती का केंद्र सरकार पर हमला, पूछा- यह गरीबों के लिए है या धन्नासेठों के लिए?

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
बसपा सुप्रीमो मायावती ने केंद्रीय बजट की आलोचना करते हुए इसे पूंजीपतियों का पोषक बताया है। उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए पिछले साल के वादों का हिसाब मांगा और पूछा कि इससे आम जनता को असल में कितनी राहत मिलेगी।
आम बजट को लेकर मायावती का केंद्र सरकार पर हमला, पूछा- यह गरीबों के लिए है या धन्नासेठों के लिए?

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए आम बजट पर सियासी घमासान जारी है। विपक्षी दलों के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बजट को पूंजीपतियों और धन्नासेठों का समर्थक बताते हुए सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मायावती ने कहा कि कोई भी बजट देश की सरकार की नीति, नीयत और उसके चाल, चरित्र व चेहरे का आईना होता है। इससे यह साफ पता चलता है कि सरकार की सोच वास्तव में गरीब, बहुजन-हितैषी और देशहित में है या फिर वह पूंजीवादी सोच को बढ़ावा देने वाली है।

सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

बसपा प्रमुख ने सरकार को घेरते हुए कहा कि उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस बजट से आम गरीब जनता को कितनी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ बातें करने से कुछ नहीं होगा, बल्कि योजनाओं को सही नीयत से अमल में लाना ज्यादा जरूरी है।

“केंद्र सरकार का बजट सत्ताधारी पार्टी की नीति व नीयत में चाल, चरित्र व चेहरे का आईना होता है, जिसमें यह झलक मिलती है कि सरकार की सोच वास्तव में गरीब व बहुजन-हितैषी होकर व्यापक देशहित की है, या फिर पूंजीवादी सोच की पोषक बड़े-बड़े पूंजीपति व धन्नासेठ समर्थक हैं।” – मायावती, बसपा सुप्रीमो

‘कहीं बड़े नाम और दर्शन छोटे न हों’

मायावती ने बजट में घोषित योजनाओं और वादों पर तंज कसते हुए कहा कि इनके नाम तो बहुत बड़े-बड़े हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि जमीनी स्तर पर इनके दर्शन छोटे न रह जाएं। उन्होंने कहा, “सर्वसमाज के हित में केवल बातें ना हों बल्कि इनपर सही नीयत से अमल भी जरूरी है।”

उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के कल्याणकारी संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व दिया गया है, यह भी देखने वाली बात है।

पिछले बजट के वादों का क्या हुआ?

मायावती ने पिछले बजट का जिक्र करते हुए सरकार से सीधा सवाल किया कि पिछले साल किए गए दावे, वादे और उम्मीदें आज कितनी पूरी हुई हैं। उन्होंने पूछा कि क्या वे वादे सिर्फ एक रस्म अदायगी बनकर रह गए हैं और क्या आम लोगों के जीवन में कोई वास्तविक बदलाव आया है?

उन्होंने जोर देकर कहा कि GDP के आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण लोगों के जीवन में गुणात्मक परिवर्तन लाना है, जो सीधे तौर पर जनहित और देशहित से जुड़ा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बजट की वाहवाही से पहले इन पहलुओं का आकलन जरूर किया जाना चाहिए।