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बजट पर पी चिदंबरम का हमला, बोले- वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वे की 10 बड़ी चुनौतियों को नजरअंदाज किया

Written by:Banshika Sharma
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने केंद्रीय बजट को निराशाजनक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में आर्थिक सर्वेक्षण में बताई गई 10 गंभीर चुनौतियों की अनदेखी की और बजट आर्थिक दूरदर्शिता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
बजट पर पी चिदंबरम का हमला, बोले- वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वे की 10 बड़ी चुनौतियों को नजरअंदाज किया

नई दिल्ली: कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने रविवार को केंद्रीय बजट की तीखी आलोचना की है। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनका भाषण और बजट, आर्थिक रणनीति और राजनीतिक दूरदर्शिता के पैमाने पर पूरी तरह विफल रहा है। चिदंबरम ने कहा कि बजट से पहले जारी आर्थिक सर्वेक्षण की गंभीर चेतावनियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

एक बयान जारी कर चिदंबरम ने कहा, “वित्त मंत्री ने 2026-27 का बजट पेश किया है। बजट से पहले टिप्पणी करने वाला हर व्यक्ति और अर्थशास्त्र का हर छात्र आज संसद में वित्त मंत्री के भाषण को सुनकर हैरान होगा।” उन्होंने कहा कि बजट सिर्फ सालाना आय-व्यय का ब्योरा नहीं होता, बल्कि उसे देश की मौजूदा चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करना चाहिए।

“मुझे पक्का नहीं पता कि सरकार और वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पढ़ा था या नहीं। अगर उन्होंने पढ़ा भी है, तो ऐसा लगता है कि उन्होंने इसे पूरी तरह से छोड़ने का फैसला कर लिया है।”- पी. चिदंबरम, वरिष्ठ कांग्रेस नेता

आर्थिक सर्वे की 10 अनदेखी चुनौतियां

चिदंबरम ने उन 10 प्रमुख चुनौतियों को गिनाया, जिनका जिक्र आर्थिक सर्वेक्षण और अन्य विशेषज्ञों ने किया था, लेकिन वित्त मंत्री के भाषण में वे नदारद रहीं।

1. व्यापार और निवेश: अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक टैरिफ से निर्माताओं, खासकर निर्यातकों पर तनाव बढ़ा है। लंबे समय से चल रहे व्यापारिक झगड़ों का निवेश पर भारी असर पड़ रहा है।

2. बढ़ता व्यापार घाटा: चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।

3. पूंजी निर्माण और FDI: सकल स्थायी पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation) की दर लगभग 30% पर कमजोर बनी हुई है और निजी क्षेत्र निवेश करने से हिचक रहा है। साथ ही, भारत में FDI का प्रवाह अनिश्चित है और पिछले कई महीनों से FPI की लगातार निकासी हो रही है।

4. राजकोषीय घाटा: राजकोषीय समेकन की गति बहुत धीमी है। राजकोषीय और राजस्व घाटा लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है, जो FRBM अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।

5. महंगाई और बेरोजगारी: आधिकारिक महंगाई के आंकड़ों और घरेलू खर्च, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। युवाओं में बेरोजगारी की स्थिति बेहद खराब है।

6. MSME सेक्टर का संकट: लाखों MSMEs बंद हो चुके हैं और जो चल रहे हैं, वे अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

7. शहरी बुनियादी ढांचा: बढ़ते शहरीकरण के साथ नगर पालिकाओं और निगमों में बुनियादी ढांचा लगातार बिगड़ता जा रहा है।

‘भाषण नीरस, तालियां भी बेमन से बजीं’

चिदंबरम ने तंज कसते हुए कहा कि वित्त मंत्री के भाषण में इन गंभीर मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं थी कि सदन में तालियां भी सिर्फ यूं ही बजीं और ज्यादातर दर्शकों ने सुनना बंद कर दिया। यहां तक कि संसद टीवी का प्रसारण भी कुछ बार बाधित हुआ।”