महोबा: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर का सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है। जल जीवन मिशन की पाइपलाइन बिछाने के बाद बदहाल हुई सड़कों का मुद्दा उठाने वाले चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत को पार्टी से मिले नोटिस के बाद अब उनके पिता और पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने सीधे जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
गंगाचरण राजपूत ने मंत्री पर पलटवार करते हुए उन्हें भी नोटिस जारी करने की मांग की है, जिससे यह मामला अब विधायक बनाम मंत्री से आगे बढ़कर एक पारिवारिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता दिख रहा है।
‘मंत्री ने तोड़ी पार्टी की मर्यादा’
पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि अगर उनके बेटे को सार्वजनिक बयानबाजी के लिए नोटिस मिल सकता है, तो यही कार्रवाई मंत्री स्वतंत्र देव सिंह पर भी होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया, “जब संगठन ने सार्वजनिक बयानबाजी पर रोक लगाई थी, तो मंत्री ने मीडिया में जाकर यह क्यों कहा कि विधायक का ‘राजनीतिक करियर खराब’ हो जाएगा? यह अनुशासनहीनता नहीं है?”
“विधायक जनता का दर्द और 20 हजार करोड़ की परियोजना में हो रही लापरवाही को सामने ला रहे थे। मंत्रियों के आसपास रहने वाले चापलूस हकीकत छुपाते हैं, जबकि ठेकेदारों ने गांवों को दलदल बना दिया है।”- गंगाचरण राजपूत, पूर्व सांसद
उन्होंने आरोप लगाया कि उनका बेटा केवल जमीनी हकीकत दिखा रहा था, लेकिन मंत्री के करीबियों ने इसे गलत तरीके से पेश किया।
क्या था पूरा विवाद?
यह पूरा टकराव तब शुरू हुआ जब कुछ दिन पहले चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत ने महोबा जिले में ‘जल जीवन मिशन’ के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों की बदहाली दिखाने के लिए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोक लिया था। उन्होंने मौके पर मंत्री को जमीनी खामियां दिखाईं और बाद में सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी की। इस घटना के बाद पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए विधायक को स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर दिया था।
सपा में जाने की अटकलों पर लगाया विराम
विधायक बृजभूषण राजपूत के भविष्य को लेकर समाजवादी पार्टी में जाने की अटकलों पर भी उनके पिता ने पूरी तरह से विराम लगा दिया। गंगाचरण राजपूत ने स्पष्ट किया, “बृजभूषण राजपूत हिंदुत्व की राजनीति करते हैं और वे भाजपा में ही रहेंगे।” उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरने वाले बयान को ‘जुबान फिसलना’ बताया और कहा कि इसके लिए माफी मांग ली जाएगी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस योजना की बदहाली से प्रदेश के कई अन्य विधायक भी परेशान हैं, लेकिन वे बोल नहीं पा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रधानों को डराकर कागजों पर काम पूरा दिखाने से हकीकत नहीं बदल जाएगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस बढ़ते पारिवारिक और राजनीतिक विवाद को कैसे संभालता है।





