मुरादाबाद: लोकसभा चुनाव 2024 में नगीना सीट से शानदार जीत दर्ज करने के बाद आत्मविश्वास से भरे सांसद चंद्रशेखर आजाद ने अब उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपनी सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। रविवार को मुरादाबाद पहुंचे चंद्रशेखर ने एक बड़ा ऐलान करते हुए साफ कर दिया कि उनकी आजाद समाज पार्टी (ASP) राज्य की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
मुरादाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान चंद्रशेखर ने अपनी भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं और प्रदेश के हर कोने में संगठन को मजबूत किया जा रहा है। उनका यह ऐलान पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने वाला माना जा रहा है।
‘जनता बदलाव चाहती है’
चंद्रशेखर आजाद ने प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता अब उन नेताओं को अच्छी तरह पहचान चुकी है जो सालों से उनके अधिकारों के नाम पर उन्हें धोखा देते आए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अब बदलाव चाहती है और आने वाले चुनाव में ऐसे नेताओं को सबक सिखाने के लिए तैयार है।
“जनता धोखा देने वाले नेताओं को जान गई है और अब आगामी चुनाव में उन्हें सबक सिखाएगी। सूबे की जनता बदलाव चाहती है।”- चंद्रशेखर आजाद, सांसद
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी राजनीति का एकमात्र मकसद बहुजन समाज को उनके हक, अधिकार और स्वाभिमान दिलाना है। आजाद के अनुसार, समाज के बुद्धिजीवी और युवा अब इस मिशन को घर-घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उठा रहे हैं ताकि पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा सके।
2022 की हार से सबक लेकर आगे बढ़ने की चुनौती
हालांकि, चंद्रशेखर आजाद और उनकी पार्टी के लिए यह राह आसान नहीं होगी। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी ने कई सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था।
खुद चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गोरखपुर सदर सीट से चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा और वह कुछ हजार वोट ही हासिल कर सके थे। ऐसे में 2027 में 403 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पार्टी को एक मजबूत संगठन और रणनीति के साथ काफी मेहनत करनी होगी।
इसके अलावा, UGC की नई गाइडलाइन पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए वह अपना स्टैंड नहीं बदलेंगे, चाहे अदालत का फैसला कुछ भी हो।






