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ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा का बिजली विभाग पर बड़ा हमला, बोले– ‘सुपारी लेकर काम कर रहे कुछ यूनियन नेता’

Written by:Saurabh Singh
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मंत्री ने दावा किया कि कुछ दिन पहले निजीकरण के विरोध के नाम पर कुछ कर्मचारी उनके सरकारी आवास पर पहुंचे और उनके परिवार के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। बावजूद इसके, उन्होंने इन लोगों को पानी पिलाया और मिठाई खिलाई।
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा का बिजली विभाग पर बड़ा हमला, बोले– ‘सुपारी लेकर काम कर रहे कुछ यूनियन नेता’

उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा एक बार फिर अपने ही विभाग के कर्मचारियों और यूनियन नेताओं पर बरस पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग में कुछ कर्मचारी नेता निजी स्वार्थ के लिए विभाग को बदनाम कर रहे हैं। मंत्री के अनुसार, इन नेताओं का मकसद केवल हड़ताल कर माहौल बिगाड़ना है, जबकि बाकी विभागों में ऐसा नहीं होता।

मंत्री एके शर्मा के आधिकारिक X हैंडल से एक पोस्ट साझा की गई, जिसमें उन्होंने बिजली विभाग में हड़ताल करने वाले कर्मचारियों को ‘अराजक तत्व’ बताया। पोस्ट में लिखा गया,

“एके शर्मा की सुपारी लेने वालों में विद्युत कर्मचारी के वेश में कुछ अराजक तत्व भी हैं। कुछ विद्युत कर्मचारी नेता काफी दिनों से परेशान घूम रहे हैं क्योंकि उनके सामने ऊर्जा मंत्री झुकते नहीं हैं। ये वही लोग हैं जिनकी वजह से बिजली विभाग बदनाम हो रहा है।”

मंत्री ने यह भी दावा किया कि उनके तीन साल के कार्यकाल में अब तक चार बार हड़ताल हो चुकी है, जिनमें से पहली तो उनके मंत्री बनने के तीन दिन बाद ही होनी थी। उन्होंने लिखा कि हड़तालों की यह श्रृंखला हाईकोर्ट के दखल के बाद ही थमी।

दूसरे विभागों में हड़ताल क्यों नहीं?

एके शर्मा ने सवाल उठाया कि आखिर सिर्फ ऊर्जा विभाग में ही हड़ताल क्यों होती है। उन्होंने लिखा,

“अन्य विभागों में हड़ताल क्यों नहीं हो रही? वहां यूनियन नहीं हैं क्या? वहां समस्या या मुद्दे नहीं हैं क्या?”

मंत्री ने दावा किया कि कुछ दिन पहले निजीकरण के विरोध के नाम पर कुछ कर्मचारी उनके सरकारी आवास पर पहुंचे और उनके परिवार के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। बावजूद इसके, उन्होंने इन लोगों को पानी पिलाया और मिठाई खिलाई।

यूनियन नेताओं से चार सवाल

एके शर्मा ने कर्मचारी यूनियन नेताओं से चार सवाल भी पूछे-

आगरा निजीकरण पर चुप्पी: 2010 में टोरेंट कंपनी को आगरा का निजीकरण सौंपा गया, तब भी यूनियन नेता वही थे। उस वक़्त विरोध क्यों नहीं हुआ? क्या इसलिए क्योंकि वे लोग विदेश टूर पर चले गए थे?

निर्णय अकेले नहीं लिया: जब एक JE तक का ट्रांसफर ऊर्जा मंत्री नहीं करता, तो निजीकरण जैसा बड़ा फैसला वे अकेले कैसे ले सकते हैं?

टास्क फोर्स का ज़िक्र: निजीकरण पर फैसला मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स ले रही है। ऊर्जा मंत्री सिर्फ क्रियान्वयन का हिस्सा हैं।

रकारी अनुमति से निजीकरण: उन्होंने कहा कि यह निर्णय राज्य सरकार की उच्चस्तरीय अनुमति से हुआ है। न कि किसी व्यक्ति विशेष की इच्छा से।

ईश्वर और जनता मेरे साथ

पोस्ट के आखिर में एके शर्मा ने लिखा,

“लगता है कि ए के शर्मा से जलने वाले सभी लोग इकट्ठे हो गए हैं। लेकिन ईश्वर और जनता एके शर्मा के साथ है। उनकी भावना बिजली की बेहतर व्यवस्था सहित जनता की बेहतर सेवा करने की है और कुछ नहीं।”

फिलहाल इस पोस्ट को लेकर कर्मचारी यूनियन की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन इतना तय है कि ऊर्जा विभाग की यह सियासी गर्मी अभी और तेज़ होने वाली है।

Saurabh Singh
लेखक के बारे में
राजनीति में गहरी रुचि. खबरों के विश्लेषण में तेज और राजनीतिक परिस्थितियों की समझ रखते हैं. देश-दुनिया की घटनाओं पर बारीक नजर और फिर उसे खबरों के रूप में लिखने के शौकीन हैं. View all posts by Saurabh Singh
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