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“प्रधान ही प्रशासक रहेंगे..” अखिलेश यादव पर जमकर बरसे मंत्री ओपी राजभर, बोले- विधानसभा तो छोड़िए, पंचायत चुनाव भी नहीं जीत पाएगी सपा

Written by:Gaurav Sharma
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उत्तर प्रदेश में पंचायतों के कार्यकाल समाप्ति पर प्रशासक बनाने के फैसले से सियासी पारा चढ़ा है। मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती दी है।

उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने के योगी सरकार के फैसले पर घमासान मचा है। इस निर्णय से समाजवादी पार्टी के खेमे में हलचल मची हुई है और वे लगातार सरकार पर हमलावर हैं। लेकिन, इस सियासी संग्राम में अब एक और खिलाड़ी ने एंट्री मारी है, जिसने सीधे सपा प्रमुख अखिलेश यादव को ललकारा है। सूबे के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है, जिसकी गूंज सियासी गलियारों में दूर तक सुनाई दे रही है।

राजभर ने अखिलेश को खुली चुनौती देते हुए दावा किया है कि कितनी भी तिकड़म लगा ली जाए, प्रधान ही अपने गाँव के प्रशासक की कुर्सी पर काबिज रहेंगे। उनकी बातों में एक अजीब सी ललकार और आत्मविश्वास था, जो यह दर्शाता है कि इस मुद्दे पर सरकार पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि समाजवादी पार्टी विधानसभा तो क्या, पंचायत चुनाव भी नहीं जीत पाएगी। राजभर ने सपा की पुरानी चुनावी रणनीतियों पर भी निशाना साधा। उनका मानना है कि अब न तो ‘पीट देगा अहीर’ वाला नारा चलेगा और न ही ‘पीट देगा अल्पसंख्यक’ की बात कोई सुनने वाला है। यह बयान सीधे तौर पर सपा के कोर वोट बैंक पर चोट करने जैसा था, जिससे सियासी पारा और चढ़ गया है।

राजभर ने दी अखिलेश यादव खुली चुनौती

राजभर का हमला सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहा, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव और उनके समर्थकों पर जोरदार वार किया। उन्होंने लिखा, “ए..अखिलेश यादव जी, कितना भी तीन-तिकड़म लगा लीजिए… प्रधान जी ही, प्रधान (प्रशासक) रहेंगे।” यह सिर्फ एक बयान नहीं था, बल्कि एक सीधी चेतावनी थी। उन्होंने सपा के कार्यकर्ताओं को ‘सपाई लोडरों’ कहकर संबोधित किया और उन्हें सलाह दी कि वे अखिलेश यादव का सूटकेस, बैग और हैंडबैग एयरपोर्ट तक ढोएं, क्योंकि ‘उनके भइया जी तो लंदन जाने वाले हैं।’ राजभर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा करने से ही उनका ‘नंबर’ बढ़ेगा और फिर वे सोशल मीडिया पर गर्व से लिखेंगे, ‘आज मुझे अखिलेश भइया जी का झोला उठाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।’ यह टिप्पणी सपा के शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच के संबंधों पर एक तीखा प्रहार थी, जिसमें उनके समर्थकों को महज ढोने वाला बताया गया।

कैबिनेट मंत्री राजभर यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे लिखा कि अभी कुछ दिन तो अखिलेश यादव एसी में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने लायक भी नहीं हैं। इसके पीछे का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके ‘प्रियजन’ लोग कोई ‘कांड’ करके पकड़ाए हैं और योगी जी की पुलिस उनकी ‘खातिरदारी प्रेम पूर्वक’ कर रही है। यह सीधे तौर पर अखिलेश के करीबियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का जिक्र था, जिस पर राजभर ने चुटकी ली। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश को पता है कि अगर वे एसी में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, तो मीडिया उनसे सूर्या या संदीप के बारे में सवाल पूछेगी। लेकिन, राजभर ने सपा को ‘घाघ’ बताते हुए कहा कि वे तुरंत असद, दिनेश यादव और मुबीन के लिए ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने लगेंगे। यह टिप्पणी सपा की रणनीति और उनके बचाव पक्ष पर सीधा हमला थी, जिसमें उन्हें मुद्दों से भटकाने वाला बताया गया।

सपा के पारंपरिक वोट बैंक पर राजभर का बड़ा राजनीतिक वार

राजभर ने अंत में एक बड़ी बात कही कि उत्तर प्रदेश के गैर-यादव पिछड़े और दलितों ने यह ठान लिया है कि इस बार पंचायत से लेकर विधानसभा तक न तो ‘पीट देगा अहीर’ चलेगा और न ही ‘पीट देगा अल्पसंख्यक (सपाई)’ चलेगा। यह बयान न सिर्फ अखिलेश यादव पर सीधा वार था, बल्कि सपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश भी थी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है। ऐसे में चुनाव में हो रही देरी को देखते हुए योगी सरकार ने यह आदेश दिया है कि निवर्तमान प्रधान ही अपने-अपने गाँव के प्रशासक के रूप में काम करेंगे। सरकार के इस फैसले को कुछ लोगों ने हाईकोर्ट में भी चुनौती दी है, जिससे यह मामला और भी पेचीदा हो गया है। लेकिन, राजभर के इस तीखे हमले ने सियासी माहौल को और गरमा दिया है, और यह साफ कर दिया है कि पंचायत चुनाव से पहले की यह लड़ाई अब व्यक्तिगत हमलों तक जा पहुंची है।

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