जहां एक ओर अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरे देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने इस पवित्र कार्य की ईमानदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार, जमीन खरीद में गड़बड़ी और मंदिर के चढ़ावे के कथित गलत इस्तेमाल के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मांग की है कि पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच कराई जाए।
दरअसल पवन पांडे ने मौजूदा एसआईटी जांच की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक इस मामले में एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई है। उनका साफ आरोप है कि ट्रस्ट के संरक्षण और मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी गड़बड़ी संभव ही नहीं है। यह बयान अपने आप में कई ऐसे सवाल छोड़ता है, जिनका जवाब अभी तक नहीं मिला है और जो लोगों के मन में संदेह पैदा करते हैं।
अखिलेश यादव ने उठाया था मुद्दा
यह पहला मौका नहीं है जब राम मंदिर से जुड़े पैसों के लेन-देन पर सवाल उठे हैं। पवन पांडे ने पत्रकार वार्ता में याद दिलाया कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले राम मंदिर में चढ़ावे और जमीन खरीद से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने न केवल आम जनता, बल्कि खुद सुप्रीम कोर्ट के भरोसे को भी ठेस पहुंचाई है, जिसने इस पवित्र उद्देश्य के लिए इसे बनाया था।
सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की अपील की
वहीं पूर्व मंत्री पवन पांडे ने इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनकी मांग है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट को तुरंत भंग किया जाए और सुप्रीम कोर्ट अपनी सीधी निगरानी में निष्पक्ष न्यायिक जांच का आदेश दे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक ट्रस्ट से जुड़े सभी लोगों के मंदिर परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि जांच की निष्पक्षता किसी भी तरह से प्रभावित न हो।
कई गंभीर आरोप लगाए
दरअसल सपा नेता ने जमीन खरीद-बिक्री में हुई कथित गड़बड़ियों पर विशेष रूप से जोर दिया। उन्होंने दावा किया कि अयोध्या में कई नजूल भूमि, विभिन्न मंदिरों से जुड़ी संपत्तियां और सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को भी तीर्थ क्षेत्र में शामिल कर लिया गया। इससे भी ज्यादा गंभीर आरोप यह है कि जिन जमीनों की असली कीमत बहुत कम थी, उन्हें कई गुना ज्यादा कीमत पर खरीदा गया। इतना ही नहीं, कुछ ऐसी जमीनों का भी अधिग्रहण किया गया, जिनकी खरीद-बिक्री नियमों के तहत संभव ही नहीं थी। यह कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
बता दें कि पवन पांडे ने मंदिर से धन और आभूषण चोरी के कथित मामलों में भी पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अगर वास्तव में ऐसी चोरी की घटनाएं हुई हैं, तो अब तक पुलिस में एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई। उन्होंने एसआईटी जांच की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर भी संदेह जताया। उनका कहना है कि बिना किसी ठोस शिकायत या एफआईआर के जांच आखिर किस दिशा में आगे बढ़ सकती है।






