डुमरियागंज के सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता जगदंबिका पाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संसदीय आचरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संतकबीरनगर जिले में एक निजी अस्पताल के उद्घाटन समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने विपक्ष, खासकर कांग्रेस की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की।
बड़गो स्थित ‘श्री आर्थो सुपर मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल’ के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे जगदंबिका पाल ने राहुल गांधी के इस दावे को खारिज कर दिया कि उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि जब वे स्वयं चेयर पर थे, तब राहुल गांधी करीब 50 मिनट तक बोलते रहे। आमतौर पर सदस्यों को 5 से 15 मिनट का समय मिलता है, ऐसे में 50 मिनट बोलने के बाद यह शिकायत करना हास्यास्पद है।
सदन की कार्यवाही और समय आवंटन
भाजपा सांसद ने बताया कि संसद में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाता है। कई बार सदन की कार्यवाही रात 12 बजे तक चलती है ताकि हर सदस्य अपने मुद्दे उठा सके। ऐसे में यह आरोप लगाना कि किसी को बोलने नहीं दिया जाता, पूरी तरह निराधार है।
पाल ने कहा कि राहुल गांधी सदन में अनर्गल आरोप लगाते हैं और जिस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं, वह एक सांसद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को है, लेकिन लोकतांत्रिक आजादी का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
स्पीकर के विरुद्ध प्रस्ताव पर आपत्ति
कांग्रेस द्वारा स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर जगदंबिका पाल ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे अनैतिक और गलत कदम बताते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं और स्पीकर के पद को राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाना संसदीय इतिहास के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि स्पीकर का पद संसदीय परंपराओं में सर्वोच्च है और इस तरह के प्रस्ताव संविधान की मर्यादा को आहत करते हैं। विपक्ष को अपनी राजनीति के लिए संवैधानिक पदों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
संसदीय परंपराओं का उल्लंघन
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार संसदीय मर्यादा को लांघ रहे हैं। सदन में उनका व्यवहार और बयानबाजी संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। जगदंबिका पाल ने कहा कि लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि संस्थाओं की मर्यादा का उल्लंघन किया जाए।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस और भाजपा के बीच संसदीय आचरण को लेकर यह टकराव लगातार बढ़ता दिख रहा है।





