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देश में पहली बार किन्नर शंकराचार्य की घोषणा की तैयारी, भोपाल बनेगा साक्षी

Written by:Bhawna Choubey
Published:
महाशिवरात्रि के अवसर पर भोपाल में होने जा रहा ऐतिहासिक पट्टाभिषेक समारोह, जहां पहली बार किन्नर समाज को शंकराचार्य पद से जोड़ने की पहल होगी, साथ ही सैकड़ों ट्रांसजेंडर सनातन परंपरा में वापसी का संकल्प लेंगे।
देश में पहली बार किन्नर शंकराचार्य की घोषणा की तैयारी, भोपाल बनेगा साक्षी

मध्य प्रदेश की राजधानी में आज एक ऐसा आयोजन होने जा रहा है, जिसे किन्नर समाज के इतिहास में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। धार्मिक परंपराओं से लंबे समय से अलग-थलग पड़े ट्रांसजेंडर समुदाय को अब मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिससे समाज में उनकी धार्मिक पहचान मजबूत हो सके।

इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह और विवाद दोनों ही देखने को मिल रहे हैं। जहां एक ओर इसे सामाजिक और धार्मिक स्वीकृति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर समुदाय के भीतर मतभेद भी सामने आए हैं। ऐसे में सबकी नजरें आज होने वाले समारोह पर टिकी हुई हैं।

पट्टाभिषेक समारोह में बनेगा इतिहास

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के लालघाटी क्षेत्र में आयोजित इस बड़े समारोह में किन्नर समाज की प्रतिनिधि काजल ठाकुर को देश का पहला किन्नर शंकराचार्य घोषित किया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार, इस पट्टाभिषेक का उद्देश्य ट्रांसजेंडर समाज को धार्मिक मंच पर सम्मानजनक स्थान दिलाना है। कार्यक्रम सुबह 10 बजे से शुरू होकर पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठानों और आशीर्वाद समारोह के साथ चलेगा।

इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से किन्नर संत, महामंडलेश्वर और साधु-संतों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। कार्यक्रम को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से ऐतिहासिक बताया जा रहा है।

किन्नर अखाड़े की पहल और कार्यक्रम की पृष्ठभूमि

इस आयोजन का नेतृत्व किन्नर अखाड़ा द्वारा किया जा रहा है, जो पिछले कुछ वर्षों से किन्नर समुदाय को धार्मिक पहचान दिलाने की कोशिश कर रहा है। किन्नर अखाड़े के संस्थापक अजय दास त्यागी ने घोषणा की कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर देश को पहला किन्नर शंकराचार्य मिलेगा। उनका कहना है कि यह कदम समाज में सम्मान और बराबरी की दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा।

इस कार्यक्रम के लिए राजस्थान समेत कई राज्यों से संत-महात्मा और धार्मिक प्रतिनिधि भोपाल पहुंचे हैं। आयोजन को भव्य बनाने के लिए कई दिनों से तैयारी चल रही थी।

200 किन्नरों की सनातन धर्म में वापसी का दावा

समारोह का एक अहम हिस्सा उन किन्नरों की “घर वापसी” भी बताई जा रही है, जो विभिन्न कारणों से धार्मिक पहचान से दूर हो गए थे। आयोजकों का दावा है कि करीब 200 ट्रांसजेंडर इस कार्यक्रम में सनातन परंपरा में वापसी का संकल्प लेंगे।

कार्यक्रम में कई नए संतों को महामंडलेश्वर की उपाधि देने की भी तैयारी है। इस पहल का उद्देश्य किन्नर समाज को धार्मिक संरचना में सम्मानजनक स्थान देना बताया जा रहा है। हालांकि, यह मुद्दा विवादों से भी घिरा हुआ है। समुदाय के कुछ अन्य समूहों ने इस कार्यक्रम पर सवाल उठाए हैं और विरोध की संभावना भी जताई जा रही है।

समुदाय के भीतर मतभेद और तनाव की स्थिति

पिछले कुछ दिनों से भोपाल में किन्नर समुदाय के अलग-अलग गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी चर्चा में रही है। कुछ समूहों का कहना है कि इस तरह के धार्मिक कार्यक्रमों का इस्तेमाल समाज को बांटने के लिए किया जा रहा है। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन सतर्क बताया जा रहा है, ताकि समारोह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

संतों और धार्मिक हस्तियों की मौजूदगी

कार्यक्रम में कई प्रमुख संतों और धार्मिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। जानकारी के अनुसार, राजस्थान से धैर्यराज नंद गिरी भी समारोह में शामिल होने पहुंचे हैं। इसके अलावा कई धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति की भी चर्चा है, जिनमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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