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शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के मानदेय में 8000 रु की वृद्धि, नई दरें अप्रैल 2026 से लागू, मई में खाते में बढ़कर आएगी सैलरी, शासनादेश जारी

Written by:Pooja Khodani
Published:
योगी कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में 8000 रुपए की वृद्धि के संबंध में शासनादेश जारी कर दिए हैं। इसका लाभ प्रदेश के 1,42,929 शिक्षामित्रों और 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों को मिलेगा।
शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के मानदेय में 8000 रु की वृद्धि, नई दरें अप्रैल 2026 से लागू, मई में खाते में बढ़कर आएगी सैलरी, शासनादेश जारी

उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके तहत शिक्षामित्रों को 10 हजार की जगह 18 हजार और अनुदेशकों का 09 की जगह 17 हजार महीने मानदेय दिया जाएगा यानि सीधे 8000 रुपए की वृद्धि की गई है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी, ऐसे में अप्रैल महीने का वेतन जो मई में प्राप्त होगा, वह नई दरों के साथ आएगा।

दरअसल, 7 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई थी, जिसमें शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद 9 अप्रैल 2026 को बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शासनादेश जारी किए हैं। इसका लाभ 1.43 लाख शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को मिलेगा। इस निर्णय से उत्तर प्रदेश सरकार पर कुल 1475.27 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त व्यय भार आएगा।

बता दें कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक केंद्र सरकार से समग्र शिक्षा अभियान के तहत 60:40 अनुपात में प्राप्त होता है। इस वृद्धि के बाद केंद्रांश के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। वहीं शेष 13,597 शिक्षामित्र के भुगतान के लिए ₹119.65 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार भी प्रदेश सरकार उठाएगी। वहीं प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में 24,717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। इस वृद्धि से राज्य सरकार पर ₹217.50 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार आएगा।

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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani
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