सीतापुर: उत्तर प्रदेश में एक बड़े जीएसटी घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें एक संगठित गिरोह फर्जी बिलों के जरिए सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा था। सीतापुर पुलिस ने एक सफल ऑपरेशन में इस गैंग के सरगना आशीष सहित चार सदस्यों को आगरा से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से बेरोजगार युवाओं को अपना निशाना बनाता था।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस रैकेट ने अब तक 1200 से ज्यादा फर्जी यानी बोगस फर्मों का रजिस्ट्रेशन कर डाला था। इन फर्जी कंपनियों के नाम पर खरीद और बिक्री के झूठे बिल तैयार किए जाते थे, जिसके आधार पर सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया।
ऐसे लगाते थे सरकार को करोड़ों का चूना
यह गिरोह एक सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपी फर्जी सेल और परचेज दिखाकर बिल जेनरेट करते थे, जिससे वे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत तरीके से लाभ उठाते थे। इन फर्मों के सभी दस्तावेज, हस्ताक्षर और रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से फर्जी थे। इस पूरे फर्जीवाड़े में सिर्फ एक ही चीज असली थी- वो पैसा जो ये लोग सरकार और अन्य लोगों से वसूलते थे।
नौकरी का झांसा देकर युवाओं को बनाते थे निशाना
इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद चौंकाने वाला है। ये लोग नौकरी की तलाश कर रहे भोले-भाले युवाओं से संपर्क करते थे। उन्हें नौकरी दिलाने का वादा करके उनके असली दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि ले लेते थे। इन्हीं असली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके वे फर्जी कंपनी बनाते, उसका रजिस्ट्रेशन कराते और फिर जीएसटी धोखाधड़ी के अपने नेटवर्क को आगे बढ़ाते थे। युवाओं को इस बात की भनक तक नहीं लगती थी कि उनके नाम पर करोड़ों का घोटाला चल रहा है।
गिरोह से भारी मात्रा में कैश और सामान बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में सामान बरामद किया है। इसमें 2 लाख रुपये से ज्यादा की नकदी, 8 मोबाइल फोन, 21 सिम कार्ड, 3 प्रिंटर और कई युवाओं के असली पहचान पत्र शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल फर्जीवाड़ा करने के लिए किया जा रहा था। सीतापुर पुलिस को अंदेशा है कि इस मामले के तार पूरे देश में फैले हो सकते हैं। पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस घोटाले का दायरा और भी बड़ा हो सकता है और कई अन्य गिरफ्तारियां संभव हैं।





