शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान ने एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। फैजाबाद संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक मामलों में सरकार को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
सांसद अवधेश प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शंकराचार्य का निर्णय समाज करता है, न कि कोई सरकार। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिसकी पहचान साधु या संत के रूप में होती है, उसे समाज पहचानता है और किसी भी तरह के सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होती।
धार्मिक परंपराओं में सरकारी दखल का विरोध
सपा सांसद ने कहा कि शंकराचार्य केवल एक पद नहीं बल्कि एक विचारधारा है। जनता के मन में साधु-संतों को लेकर गहरी आस्था होती है और इसमें किसी भी सरकार को प्रमाण पत्र देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक परंपराओं और आस्थाओं का अपना स्वतंत्र स्वरूप होता है, जिसे राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है क्योंकि यह धार्मिक प्रतिष्ठा और राजनीतिक टिप्पणी दोनों से जुड़ा हुआ है।
2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया भाषण के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जब अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद से पूछा गया कि क्या 2027 के चुनावों का खाका खींचा जा चुका है, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया।
“किसी भी प्रकार का कोई भी खाका अभी तय नहीं किया गया है। 2027 में PDA की सरकार बनेगी और यह सरकार अखिलेश यादव के नेतृत्व में प्रदेश के किसानों, युवाओं और मजदूरों और PDA समाज के सभी वर्गों को समर्पित रहेगी।” — अवधेश प्रसाद
वर्तमान सरकार पर विकास रोकने का आरोप
अवधेश प्रसाद ने वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में विकास नहीं हुआ है, बल्कि विकास को रोका गया है। उन्होंने दावा किया कि 2027 में उनकी सरकार बनते ही प्रदेश में सभी रुके हुए विकास कार्यों को फिर से गति दी जाएगी।
सपा सांसद के इस बयान के बाद शंकराचार्य विवाद और 2027 चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से उठाने की तैयारी में हैं।





