मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। स्पेशल के मुताबिक प्रदेश में 81000 से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की जाएगी। यह भर्तियां उप निरीक्षक, पुलिस उप निरीक्षक गोपनीय, रेडियो सहायक परिचालक, आरक्षी नागरिक पुलिस, कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड ए जैसी श्रेणियों में की जाएगी।
इस संबंध में मुख्यमंत्री की ओर से पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड को निर्देश दे दिए गए हैं। यह सीधी भर्ती है जो पारदर्शिता के साथ निर्धारित आरक्षण प्रावधानों के अनुसार की जाएगी। इस संबंध में गुरुवार को उन्होंने पुलिस विभाग और उससे संबंधित विभिन्न इकाइयों की कार्य योजनाओं को लेकर समीक्षा की और कई निर्देश दिए।
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काम को बेहतर बनाने के निर्देश
अपने निवास पर रखी गई इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने नए पदों पर भर्ती के निर्देश तो दिए ही हैं। इसके अलावा फिलहाल काम कैसे किया जा रहा है उसकी भी समीक्षा की है। उन्होंने वर्तमान में लग रहे 6 मिनट के औसत रिस्पांस टाइम को कम करने फील्ड और पेट्रोलिंग में बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए हैं। इसी के साथ मुख्यमंत्री आवास, राजभवन और पुलिस मुख्यालय सहित महत्वपूर्ण स्थान पर लंबे समय से जो पुलिसकर्मी तैनात हैं, उनके स्थानांतरण के निर्देश भी दिए गए हैं।
बेहतर बनाई जाएगी अग्निशमन सेवा
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अग्निशमन और आपात सेवा को पहले से ज्यादा बेहतर बनाया जाएगा। अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी की 2025 26 के दौरान 42000 अग्नि कांडों पर नियंत्रण किया गया है। 10000 से अधिक आपात घटनाओं में परत कार्रवाई करते हुए 800 करोड रुपए की संपत्ति बचाई गई है। यह सुनने के बाद मुख्यमंत्री निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों में एक हाइड्रोलिक फाइटर टेंडर अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए। उन्होंने एक तहसील एक फायर टेंडर लक्ष्य को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
दिए जरूरी निर्देश
इस बैठक के दौरान नागरिक सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया की सभी जिलों में इकाइयों का गठन किया गया है और लगभग 7500 स्वयंसेवकों की भर्ती की गई है। साइबर मुख्यालय के अधिकारियों ने साइबर संबंधित अपराधों से 425 दर्शन में 7 करोड़ की धनराशि सुरक्षित करने पिछले वित्तीय वर्ष में प्राप्त हुई 2,40,0 15 शिकायत तो में से 7287 मामलों में कार्रवाई करने की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री की ओर से कारगर प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग के अधिकारियों को न्यायालय की पेशी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के सुविधा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।