योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 68 हजार सरकारी कर्मचारियों का रोका वेतन, जा​नें क्या रही वजह

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कड़ा कदम उठाया है। संपत्ति का ब्योरा न देने वाले करीब 68 हजार राज्य कर्मचारियों का जनवरी माह का वेतन रोक दिया गया है। जब तक ये कर्मचारी अपनी चल-अचल संपत्ति की जानकारी मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं करते, उन्हें वेतन नहीं मिलेगा।
UP Government Employees

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। प्रदेश के करीब 68 हजार सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को फरवरी में जनवरी महीने का वेतन नहीं मिलेगा। इन कर्मचारियों ने 31 जनवरी की समय सीमा तक अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा सरकार के मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन दाखिल नहीं किया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है।

सरकार ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी राज्य कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत अपनी संपत्ति की जानकारी देना अनिवार्य है। मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की ओर से इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन हजारों कर्मचारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब ब्योरा देने के बाद ही उनका रुका हुआ वेतन जारी किया जाएगा।

सबसे ज्यादा तृतीय श्रेणी के कर्मचारी डिफॉल्टर

आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 8,66,261 सरकारी कर्मचारी हैं। इनमें से 68,236 कर्मचारियों ने तय समय तक अपनी संपत्ति का विवरण ऑनलाइन अपलोड नहीं किया। संपत्ति का ब्योरा न देने वालों में सबसे बड़ी संख्या तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, संपत्ति की जानकारी न देने वालों में 34,926 तृतीय श्रेणी, 22,624 चतुर्थ श्रेणी, 7,204 द्वितीय श्रेणी और 2,628 प्रथम श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा 1,612 अन्य कार्मिकों में से भी 854 ने अपनी संपत्ति की जानकारी नहीं दी है, जिनका वेतन भी रोक दिया गया है।

इन विभागों के कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई

जिन विभागों के कर्मचारियों ने संपत्ति का ब्योरा देने में लापरवाही बरती है, उनमें कई प्रमुख विभाग शामिल हैं। इनमें लोक निर्माण विभाग (PWD), राजस्व, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा, समाज कल्याण, महिला कल्याण, सहकारिता और आबकारी विभाग प्रमुख हैं।

इसके अलावा खाद्य एवं रसद, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अभियंत्रण, उद्यान, पशुधन और परिवहन विभाग के भी कई कर्मचारियों ने समय पर जानकारी नहीं दी है, जिसके चलते उन पर यह कार्रवाई की गई है। सरकार का यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार की किसी भी संभावना को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
Shyam Dwivedi

7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
Follow Us :GoogleNews