उत्तर प्रदेश में तपेदिक (टीबी) के उन्मूलन की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। फरवरी से प्रदेशभर में 100 दिनों का ‘विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान’ शुरू किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक मरीजों की पहचान कर उनका तत्काल इलाज शुरू करना है, जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है।
स्वास्थ्य महानिदेशक ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। अभियान की सफलता के लिए सांसदों, विधायकों से लेकर पार्षदों और ग्राम प्रधानों तक को शामिल करने का निर्देश है। इसके अलावा, सरकार टीबी रोगियों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार के लिए प्रशिक्षित करने हेतु कौशल विकास विभाग के साथ भी समन्वय कर रही है।
अभियानों से मृत्यु दर में 17% की कमी
स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल के अनुसार, प्रदेश में पहले चलाए गए सघन अभियानों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इन प्रयासों के चलते वर्ष 2015 की तुलना में प्रति एक लाख की आबादी पर टीबी मरीजों की संख्या में 17 प्रतिशत की कमी आई है। साथ ही, टीबी के कारण होने वाली मृत्यु दर में भी 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इन्हीं सफलताओं को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक बार फिर यह सघन अभियान चलाया जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों से लेकर स्वयंसेवकों तक की होगी भागीदारी
स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजी) डॉ. आरपी सिंह सुमन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अभियान में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके तहत सभी सीएमओ को दो महीने के भीतर सांसदों के साथ जिला स्तरीय समीक्षा बैठकें करने को कहा गया है।
इन बैठकों के अलावा विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों को भी निःक्षय शिविरों व अन्य गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘माई भारत’ के स्वयंसेवकों और पंजीकृत निःक्षय मित्रों का भी सहयोग लिया जाएगा।
उच्च जोखिम वाले समूहों पर विशेष नजर
इस 100 दिवसीय अभियान के दौरान कुछ खास समूहों और जगहों पर स्क्रीनिंग पर जोर रहेगा।
डीजी ने सभी कारागारों, मलिन बस्तियों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों की टीबी स्क्रीनिंग कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक निबंध और पोस्टर प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों को जागरूक किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे टीबी के लक्षण वाले लोगों को जांच के लिए प्रेरित कर सकें। अभियान के तहत परिवहन विभाग से जुड़े ड्राइवरों, कंडक्टरों और कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों की भी शिविर लगाकर जांच की जाएगी।
अभियान की प्रमुख रणनीतियां
इस विशेष अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कई रणनीतिक लक्ष्य तय किए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से ओपीडी के पांच प्रतिशत और जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों से 10 प्रतिशत मरीजों को टीबी जांच के लिए रेफर किया जाएगा। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से जांच के लिए सैंपल इकट्ठा करने और उन्हें लैब तक पहुंचाने के लिए सैंपल ट्रांसपोर्टरों की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों, कॉरपोरेट घरानों और अन्य संस्थानों को ‘निःक्षय मित्र’ बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।





