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UP की नई आबकारी नीति 2026-27 का ढांचा तैयार, डिस्टिलरी प्लांट और निर्यात पर रहेगा खास फोकस

Written by:Ankita Chourdia
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उत्तर प्रदेश सरकार राजस्व बढ़ाने और निवेश को गति देने के लिए नई आबकारी नीति 2026-27 तैयार कर रही है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य डिस्टिलरी प्लांट की स्थापना को बढ़ावा देना और निर्यातकों को विशेष सहूलियतें प्रदान करना है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
UP की नई आबकारी नीति 2026-27 का ढांचा तैयार, डिस्टिलरी प्लांट और निर्यात पर रहेगा खास फोकस

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और राजस्व के स्रोतों को मजबूत करने के लिए योगी सरकार एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। प्रदेश का आबकारी विभाग नई आबकारी नीति 2026-27 पर काम कर रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में डिस्टिलरी प्लांट की स्थापना को प्रोत्साहित करना और निर्यात को बढ़ावा देना है।

प्रदेश सरकार ने आबकारी विभाग को राजस्व बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद इस नई नीति पर मंथन शुरू हुआ है। इसका लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जो निवेशकों के लिए अनुकूल हो और राज्य की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करे।

डिस्टिलरी हब बनेगा उत्तर प्रदेश

नई नीति के तहत उत्तर प्रदेश को डिस्टिलरी उद्योग के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की योजना है। इसके लिए नई डिस्टिलरी इकाइयों की स्थापना को आसान और आकर्षक बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल सरकारी राजस्व में भारी वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लाइसेंस प्रक्रिया को पहले से अधिक पारदर्शी और समयबद्ध करने पर विचार हो रहा है। इसके अलावा, शुल्क संरचना को युक्तिसंगत बनाने और प्लांट स्थापना के लिए जरूरी अनुमतियों में सहूलियत देने की भी तैयारी है। अधिकारियों का मानना है कि इन कदमों से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, जो प्रदेश की ‘निवेश मित्र’ और ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ जैसी उद्योग-अनुकूल नीतियों का ही विस्तार है।

निर्यातकों के लिए खुलेंगे नए रास्ते

आबकारी विभाग नई नीति में निर्यात पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। प्रदेश में उत्पादित स्परिट, अल्कोहल और इनसे जुड़े अन्य उत्पादों के निर्यात को आसान बनाने के लिए कई प्रावधान किए जा रहे हैं।

इसके तहत नियमों में ढील देने, लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाने और निर्यातकों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने जैसे कदमों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना और विदेशी मुद्रा अर्जन को बढ़ावा देना है।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा

डिस्टिलरी उद्योग के विस्तार का सीधा लाभ प्रदेश के किसानों को भी मिलेगा। डिस्टिलरी प्लांट की संख्या बढ़ने से गन्ना, अनाज और अन्य कृषि आधारित कच्चे माल की मांग बढ़ेगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही, इस उद्योग के विस्तार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं भी पैदा होंगी।