
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में 2026 के पंचायत चुनावों के लिए मतदाता सूची संशोधन के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है। जैतपुर ग्राम पंचायत में एक मकान (नंबर 803) में 4,271 मतदाता दर्ज पाए गए, जो कि कुल 16069 मतदाताओं का लगभग एक-चौथाई है। पास के पनवारी कस्बे में भी वार्ड 13 के मकान नंबर 996 में 243 और मकान नंबर 997 में 185 मतदाता दर्ज किए गए। अधिकारियों ने इसे गलती बताते हुए कहा कि यह डेटा एंट्री के दौरान पते के गलत जोड़ने से हुई।
जिला सहायक निर्वाचन अधिकारी आरपी विश्वकर्मा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों के नंबर अक्सर ठीक से दर्ज नहीं होते, जिसके कारण कई नाम एक ही पते से जोड़ दिए गए। इसे अब सुधारा जा रहा है। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कुंवर पंकज सिंह ने इसे हाउस नंबरिंग मिसमैच करार देते हुए कहा कि 2021 में भी ऐसी अनियमितताएं सामने आई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता असली हैं, केवल उनके पते गलत दर्ज हुए हैं।
लापरवाही पर नाराजगी जताई
स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताई है। पनवारी में एक मकान मालिक और सामाजिक कार्यकर्ता चौधरी रविंद्र कुमार ने इसे गंभीर चूक बताते हुए कहा कि इससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। जैतपुर और पनवारी में मकानों में विभिन्न जातियों और समुदायों के मतदाताओं के नाम दर्ज होने से लोग हैरान हैं और इसे प्रशासन की लापरवाही मान रहे हैं।
सत्यापन अभियान हुआ शुरू
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस समस्या को दूर करने के लिए 29 सितंबर तक चलने वाला एक सत्यापन अभियान शुरू किया है, जिसमें 486 बूथ-स्तरीय अधिकारी और 49 सुपरवाइजर शामिल हैं। पिछले साल एक AI-सहायता प्राप्त ऑडिट में महोबा जिले में 1 लाख से अधिक संदिग्ध या दोहरे मतदाता पाए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि ये छोटी-मोटी गलतियां हैं, जिन्हें ठीक किया जा रहा है लेकिन स्थानीय लोग और विपक्षी नेता इसे व्यवस्थागत लापरवाही का सबूत मानते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।
