लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लापता हो रहे लोगों की बढ़ती संख्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। पिछले दो सालों में राज्य से 1,08,300 लोगों के गायब होने और उनमें से केवल 9,700 लोगों के ही मिल पाने के सरकारी आंकड़ों का स्वतः संज्ञान लेते हुए लखनऊ बेंच ने एक जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश दिया है।
गुरुवार को इस मामले पर हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को तलब किया है। अदालत ने दोनों शीर्ष अधिकारियों को अगली सुनवाई पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर जवाब देने का निर्देश दिया है।
चौंकाने वाले आंकड़ों पर कोर्ट की चिंता
यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक सरकारी हलफनामे में पेश किए गए आंकड़ों ने खुद अदालत को भी चौंका दिया। हलफनामे के अनुसार, पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में कुल 1,08,300 लोग लापता हुए। चिंता की बात यह है कि पुलिस इनमें से मात्र 9,700 लोगों को ही ढूंढ पाई।
इन आंकड़ों को ‘गंभीर और चिंताजनक’ करार देते हुए हाईकोर्ट ने बुधवार को ही इस पर स्वतः संज्ञान लेकर “प्रदेश में गुमशुदा लोगों के संबंध में” शीर्षक से एक जनहित याचिका (PIL) दर्ज करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि ये आंकड़े दिखाते हैं कि संबंधित अधिकारी इस गंभीर मामले को लेकर उदासीन और लापरवाह रवैया अपना रहे हैं।
एक पिता की याचिका बनी बड़ा मुद्दा
अदालत का यह हस्तक्षेप लखनऊ के चिनहट निवासी एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई के दौरान हुआ। याची ने कोर्ट को बताया था कि उसका बेटा पिछले साल जुलाई में लापता हो गया था, जिसकी गुमशुदगी चिनहट थाने में दर्ज कराई गई थी। लेकिन पुलिस की ओर से कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई।
इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से गुमशुदा लोगों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी, जिसके बाद यह भयावह तस्वीर सामने आई।
23 मार्च को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च की तारीख तय की है। उस दिन ACS (गृह) और DGP को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड और आंकड़ों के साथ पेश होना होगा और यह बताना होगा कि इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।





