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मणिकर्णिका घाट विवाद: DM सत्येंद्र कुमार ने कहा- ‘देवी अहिल्याबाई की प्रतिमाएं सुरक्षित, पुनर्निर्माण के बाद फिर होंगी स्थापित’

Written by:Banshika Sharma
Published:
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर 300 साल पुरानी धरोहरों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर प्रशासन ने सफाई दी है। DM सत्येंद्र कुमार ने कहा कि देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा समेत सभी कलाकृतियां सुरक्षित हैं और पुनर्निर्माण पूरा होने पर उन्हें फिर से सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाएगा।
मणिकर्णिका घाट विवाद: DM सत्येंद्र कुमार ने कहा- ‘देवी अहिल्याबाई की प्रतिमाएं सुरक्षित, पुनर्निर्माण के बाद फिर होंगी स्थापित’

Manikarnika Ghat Varanasi Bulldozer

वाराणसी: सोशल मीडिया पर मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास कार्य से जुड़ा एक वीडियो वायरल होने के बाद उठे विवाद पर वाराणसी प्रशासन ने अपना पक्ष रखा है। वाराणसी के DM सत्येंद्र कुमार ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्य के दौरान किसी भी ऐतिहासिक प्रतिमा को नष्ट नहीं किया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि देवी अहिल्याबाई होलकर से जुड़ी मूर्तियों सहित सभी कलाकृतियों को संरक्षित कर लिया गया है और काम पूरा होने पर उन्हें फिर से स्थापित किया जाएगा।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब जेसीबी मशीन से घाट पर तोड़फोड़ का एक वीडियो सामने आया, जिसके बाद स्थानीय लोगों, इतिहासकारों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर लगभग 300 साल पुरानी विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

प्रशासन ने क्यों दी सफाई?

मणिकर्णिका घाट पर चल रहे निर्माण कार्य को लेकर कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। आरोप था कि पुनर्विकास की प्रक्रिया में घाट की ऐतिहासिक संरचना और देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा को क्षति पहुंचाई गई है। इस कार्रवाई की निंदा वाराणसी के अलावा इंदौर समेत मध्य प्रदेश के कई शहरों में भी हुई, क्योंकि देवी अहिल्याबाई का इंदौर से गहरा नाता रहा है। इन्हीं आरोपों और बढ़ते विरोध के बीच प्रशासन को आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा।

क्या है प्रशासन का पक्ष?

DM सत्येंद्र कुमार के अनुसार, मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार के लिए आने वाले लोगों की भारी संख्या के कारण लंबे समय से जगह की कमी, गंदगी और अव्यवस्था जैसी समस्याएं थीं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए घाट के पुनर्विकास की योजना बनाई गई। उन्होंने बताया कि पुराने घाट की सीढ़ियों और कच्चे हिस्से का पुनर्निर्माण किया जा रहा है।

“पुनर्निर्माण के दौरान मिली देवी अहिल्याबाई होलकर की मूर्तियों और अन्य कलाकृतियों को संस्कृति विभाग द्वारा सुरक्षित रख लिया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन्हें पूरे विधि-विधान से उसी स्थान पर पुनः स्थापित किया जाएगा।” — सत्येंद्र कुमार, DM, वाराणसी

प्रशासन ने यह भी दावा किया कि किसी भी मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है और सभी ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए ही विकास कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा घाट

इस पुनर्विकास योजना के तहत मणिकर्णिका घाट पर कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें शवदाह के लिए नए प्लेटफॉर्म, प्रदूषण रहित चिमनी, पंजीकरण और प्रतीक्षा कक्ष, और हरित क्षेत्र का विकास शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि इन सुविधाओं से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिजनों को काफी सहूलियत मिलेगी। वहीं, इतिहासकारों और सांस्कृतिक संगठनों का कहना है कि विकास के दौरान ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए और अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता थी।