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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा की शुरू, जानिए क्या है रूट और तिथियां?

Written by:Ankita Chourdia
Published:
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार सुबह वाराणसी से गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा की शुरुआत की और इसे लखनऊ तक ले जाने का कार्यक्रम घोषित किया। यात्रा शुरू करते हुए उन्होंने गौ-रक्षा के मुद्दे पर सरकार से सवाल किए और कहा कि गौहत्या के खिलाफ जनसमर्थन जुटाया जाएगा। 7 से 11 मार्च 2026 तक विभिन्न जिलों में सभाओं के बाद लखनऊ में धर्मयुद्ध का शंखनाद करने की योजना है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा की शुरू, जानिए क्या है रूट और तिथियां?

वाराणसी से शनिवार, 7 मार्च 2026 को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो गई। वे पालकी में सवार होकर निकले और यात्रा के शुरुआती वक्त ही गौ-रक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उनका कहना रहा कि स्थिति ऐसी हो गई है कि अपने ही चुने हुए जनप्रतिनिधियों के सामने गौ-माता की रक्षा के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।

यात्रा शुरू होने से पहले विद्यामठ गली के बाहर सुरक्षा बल तैनात रहा। शंकराचार्य ने पहले गौ-पूजन किया, फिर सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर यात्रा का प्रस्थान हुआ। कार्यक्रम के अनुसार यह यात्रा वाराणसी से निकलकर चरणबद्ध तरीके से लखनऊ पहुंचेगी।

‘जब रोकेंगे तो रुक जाएंगे, लेकिन क्यों रोकेंगे ये सवाल है।’ — शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

यात्रा का धार्मिक क्रम और राजनीतिक संदेश

यात्रा की शुरुआत के बाद शंकराचार्य ने कहा कि वे पहले चिंतामणि गणेश जी के दर्शन कर रहे हैं और उसके बाद संकट मोचन जाएंगे। उनके मुताबिक गौ-माता पर आए संकट के निवारण के लिए प्रार्थना की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दल इस पहल के राजनीतिक अर्थ निकालते हैं, जबकि वे इसे धार्मिक दायित्व के रूप में देख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अब लोगों को धर्मयुद्ध के लिए निकलना पड़ रहा है और यह यात्रा संघर्ष की दिशा में बढ़ रही है। शंकराचार्य ने बताया कि अभी तक सरकार की ओर से कोई संदेश नहीं आया है। उन्होंने विधायकों और सांसदों से भी इस यात्रा में शामिल होने की अपील की।

गौहत्या के मुद्दे पर व्यापक आह्वान

शंकराचार्य ने सार्वजनिक अपील में कहा कि हर हिंदू गौहत्या रुकवाना चाहता है और इस मुद्दे पर एकजुटता जरूरी है। उन्होंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी समुदायों से साथ आने का आग्रह किया। जनसंदेश में लखनऊ पहुंचने की भी अपील की गई, जहां अंतिम चरण में बड़ा कार्यक्रम प्रस्तावित है।

उनका तर्क रहा कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि नीति-स्तर पर हस्तक्षेप की मांग भी है। इसी वजह से यात्रा को सभा-केंद्रित रखा गया है, ताकि अलग-अलग जिलों में समर्थन जुटाया जा सके और मुद्दे को संगठित रूप से उठाया जा सके।

7 से 11 मार्च तक पूरा कार्यक्रम

यात्रा का निर्धारित रूट और तिथियां सार्वजनिक कर दी गई हैं। 7 मार्च 2026 को वाराणसी से चलकर जौनपुर और सुल्तानपुर में सभाएं करते हुए दल रायबरेली पहुंचेगा, जहां रात्रि विश्राम रखा गया है।

8 मार्च 2026 को मोहनलालगंज, लालगंज और अचलगंज में सभाओं के बाद उन्नाव में कार्यक्रम और रात्रि विश्राम होगा। 9 मार्च 2026 को बांगरमऊ और बघोली में सभाएं प्रस्तावित हैं, इसके बाद नैमिषारण्य में सभा और रात्रि विश्राम का कार्यक्रम है।

10 मार्च 2026 को सिंधौली और इजौटा में सभाओं के बाद यात्रा का लखनऊ आगमन तय किया गया है। 11 मार्च 2026 को दोपहर 2 बजे कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर पहुंचकर गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध का शंखनाद करने की घोषणा की गई है।

पूरे घटनाक्रम में वाराणसी से लेकर लखनऊ तक धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संदेशों का मिश्रित स्वर दिखाई दे रहा है। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और यात्रा के मार्ग पर निगरानी बनी हुई है, जबकि आयोजक इसे गौ-रक्षा के मुद्दे पर जनसमर्थन अभियान के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।

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