
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से जुड़े कथित दुर्व्यवहार के मुद्दे ने बंगाल से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में इस पूरे प्रकरण को गंभीर संवैधानिक और सामाजिक अपमान बताया। उनका कहना है कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के प्रति इस तरह का व्यवहार किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
CM योगी का बयान सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ममता बनर्जी सरकार पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राष्ट्रपति पद पर आसीन व्यक्ति के साथ अनुचित व्यवहार का मामला नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र और संस्थागत गरिमा पर चोट है। उनके बयान में जनजातीय अस्मिता और महिलाओं के सम्मान का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया।
योगी ने किन बिंदुओं पर जताई आपत्ति
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संथाल जनजाति से आती हैं, इसलिए यह विवाद जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक गरिमा से भी जुड़ता है। उनके अनुसार, इस घटना को सामान्य राजनीतिक मतभेद के दायरे में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मान्यताओं के विपरीत आचरण करार दिया।
उन्होंने TMC पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ऐसे व्यवहार से पार्टी का राजनीतिक अहंकार और ओछी मानसिकता सामने आती है। योगी का कहना था कि राष्ट्रपति का पद भारतीय गणतंत्र की सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है, इसलिए इस स्तर पर किसी भी प्रकार की असंवेदनशीलता राष्ट्रव्यापी चिंता का विषय बनती है।
“मा. राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी के प्रति पश्चिम बंगाल में हुआ व्यवहार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अक्षम्य है। यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, मातृशक्ति और जनजातीय समाज की अस्मिता का अपमान है।” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मा. राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी के प्रति पश्चिम बंगाल में हुआ व्यवहार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अक्षम्य है। यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, मातृशक्ति और जनजातीय समाज की अस्मिता का अपमान है।
राष्ट्रपति का पद भारतीय गणतंत्र की सर्वोच्च संवैधानिक…
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) March 7, 2026
सार्वजनिक माफी की मांग क्यों प्रमुख बनी
अपने बयान में CM योगी ने यह भी कहा कि इस कथित कृत्य से पूरा देश आहत है। इसी आधार पर उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार से बिना देरी पूरे देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने इस व्यवहार को अमर्यादित और असंवैधानिक बताया।
राजनीतिक तौर पर यह मांग इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह मुद्दा संवैधानिक शिष्टाचार, संघीय राजनीति और पहचान-आधारित प्रतिनिधित्व—तीनों को एक साथ छूता है। राष्ट्रपति पद के सम्मान का प्रश्न जब राजनीतिक बहस का केंद्र बनता है, तो दलों की भाषा और रुख दोनों राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं।
BJP-TMC टकराव में नया मोड़
CM योगी के बयान के बाद भाजपा और TMC के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के संकेत मिले हैं। भाजपा इस मुद्दे को जनजातीय समाज और महिलाओं के सम्मान से जोड़कर उठा रही है। दूसरी ओर, बंगाल की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है, इस पर भी नजर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद से जुड़ा कोई भी विवाद सामान्य राजनीतिक बयानबाजी से आगे जाकर व्यापक असर छोड़ता है। खासकर तब, जब उसमें संवैधानिक पद की गरिमा, सामाजिक प्रतिनिधित्व और दलगत आचरण—तीनों पर सवाल उठें।
फिलहाल, इस मामले में राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं और CM योगी की सार्वजनिक माफी वाली मांग ने विवाद को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। अगले चरण में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस पर पश्चिम बंगाल सरकार और TMC की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया किस रूप में आती है।
कंटेंट राइटर

